Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    नॉर्वे-स्वीडन के पेरेंट्स क्यों अकेले छोड़ देते हैं बच्चों को? समझें यह अनोखा स्कैंडिनेवियन पेरेंटिंग स्टाइल

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 06:00 PM (IST)

    अब वही पुरानी घिसे-पिटे सख्त मिजाज वाले पेरेटिंग स्टाइल नई जेनरेशन के बच्चों पर काम नहीं कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    स्कैंडिनेवियन इंडिपेंडेंस पैरेंटिंग स्टाइल की खासियत (Image Source: AI Generated)

    स्कैंडिनेवियन इंडिपेंडेंस पैरेंटिंग स्टाइल की खासियत (Image Source: AI Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जिस तरह भारत में परवरिश करने का तरीका अलग है, उसी तरह दूसरे देशों में भी परवरिश के लिए अलग तरीकों को फॉलो किया जाता है। अब वही पुरानी घिसे-पिटे सख्त मिजाज वाले पेरेटिंग स्टाइल नई जेनरेशन के बच्चों पर काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में पेरेंट्स को जरूरत है उनकी परवरिश में थोड़ा बदलाव करने की। इसे देखते हुए आज हम बात करेंगे स्कैंडिनेवियन इंडिपेंडेंस पैरेंटिंग स्टाइल की, जिसकी बात दुनियाभर में की जाती है। 

    क्या है स्कैंडिनेवियन पैरेंटिंग स्टाइल? 

    यह पेरेटिंग स्टाइल स्कैंडिनेवियन देशों जैसे- नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क में पॉपुलर है। इसके नाम से पता चल रहा है, ऐसा पेरेटिंग स्टाइल जिसमें आजादी शामिल हो। इस तरह की परवरिश में माता-पिता अपने बच्चों को समानता और उनके अधिकार देने की बात करते हैं। आसान शब्दों में इसे समझें तो बच्चों को कुछ मामलों में एकदम आजाद छोड़ देना। 

    स्कैंडिनेवियन पैरेंटिंग स्टाइल की खासियत 

    स्कैंडिनेवियन इंडिपेंडेंस पैरेंटिंग स्टाइल इसलिए खास है क्योंकि इसमें मां-बाप अपने बच्चों को फैसले लेने, उनकी राय सुनने और बराबरी का व्यवहार करने पर विश्वास करते हैं। आइए जानते हैं इस पेरेटिंग स्टाइल की खासियत: 

    1. नेचर के साथ समय बिताना जरूरी 

    नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे देशों में सुबह और शाम की वॉक खास मानी जाती है। ये लोग बाहर समय बिताना, पार्क में बैठकर खाना और सोशलाइज होना पसंद करते हैं, यहां किंडरगार्टन का खुले में होना आम बात है। दरअसल, नेचर में रहना इनके कल्चर का एक हिस्सा है। इस तरीके को वहां की भाषा में ‘Friluftsliv’ कहा जाता है, जिसका मतलब होता है - ‘खुली हवा में जिंदगी’। इससे बच्चों का नेचर के साथ एक कनेक्शन बनने में मदद मिलती है। 

    खबरें और भी

    1. आराम और सुकून की फीलिंग 

    स्कैंडिनेवियन देशों में आराम और सुकून की फीलिंग को अहम मानते हैं, इसे वहां लोग ‘hygge’ यानी हूगा कहते हैं। इसका मतलब समझें तो यह तरीका परिवार के साथ इमोशनल कनेक्शन बनाने और सेल्फ केयर पर जोर देता है। पेरेंट्स स्क्रीन से दूरी बनाकर कमरे में आरामदायक माहौल बनाते हैं और परिवार के साथ रहकर प्रेजेंट मोमेंट जीते हैं।  

    1. भरोसा और आजादी 

    इस तरह के पेरेटिंग स्टाइल में बच्चे को बचपन से ही आजादी देने के साथ यह भरोसा जताया जाता है कि वह काबिल है। इस कॉनसेप्ट को वहां ‘Tillid’ यानी भरोसा कहते हैं। उदाहरण के लिए किसी 6-7 साल के बच्चे का खुद सुबह उठकर स्कूल के लिए तैयार होना और अकेले बस में सफर करना।  

    1. सादगी को बढ़ावा देना 

    मॉडर्न दुनिया में जहां बर्थडे पार्टी और जश्नों का शोर है तो वहीं स्कैंडिनेवियन पेरेंट्स अपने बच्चों को सादगी का प्रिंसिपल सिखाते हैं, जिसे वहां ‘Enkelthed’ कहा जाता है। 

    1. सम्मान की नींव रखना 

    यहां बच्चों में अपने से बड़ों का सम्मान करने और छोटों को प्यार देने के साथ बराबरी का बर्ताव करने के लिए ‘Ligeværd’ कॉनसेप्ट को फॉलो किया जाता है। इसमें बच्चों को बताते हैं कि वो फ्यूचर के एडल्ट नहीं हैं, बल्कि अभी भी एक इंसान हैं जिसकी फीलिंग, बाउंड्री और राय बराबर मायने रखती है। 

    1. कम्यूनिटी की जिम्मेदारी 

    यह पेरेटिंग स्टाइल सिर्फ पेरेंट्स पर बच्चों की परवरिश का भार नहीं डालता, बल्कि इसे पूरी कम्यूनिटी की जिम्मेदारी मानता है। जिसे वहां के लोग ‘Samfundssind’ कहते हैं। 

    1. जाने देने की कला सिखाना

    ‘Pyt’ नाम का यह प्रिंसिपल जाने देने की बात कहता है, हर वो चीज जिसपर टाइम और एनर्जी बर्बाद करने से फ्यूचर में कुछ नहीं मिलने वाला। बच्चों को अपने मुश्किल समय को अपनाने और अपनी ग्रोथ के लिए आगे काम करने की मोटिवेशन देना इसका उद्देश्य है।