पेरेंट्स नहीं समझ पाते आपकी बात? शांत रहकर ये फॉलो करें ये तरीके, खुद बदल जाएगा उनका बर्ताव
पेरेंट्स अपने पुराने तौर-तरीके छोड़ने को तैयार नहीं होते, वहीं बच्चे अपने तरीके से जिंदगी जीने पर अड़े रहते हैं। ...और पढ़ें

बच्चे पेरेंट्स के साथ बिना बहस के जेनरेशन गैप ऐसे करें कम (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जेनरेशन गैप एक ऐसी परेशानी है जो पेरेंट्स और बच्चों के बीच रिश्ते को कमजोर कर सकती है। पेरेंट्स अपने पुराने तौर-तरीके छोड़ने को तैयार नहीं होते, वहीं बच्चे अपने तरीके से जिंदगी जीने पर अड़े रहते हैं। यहीं से शुरू होता है एक गैप, जिसे समय रहते अगर भरा न जाए तो वह दूरी और कड़वाहट में बदल जाता है। ऐसे में अगर आप अपने पेरेंट्स के इस गैप को बहुत ज्यादा महसूस कर रहे हैं तो ऐसे कई तरीके हैं जिनकी मदद से स्थिति को ठीक किया जा सकता है।
बच्चे पेरेंट्स के साथ बिना बहस के जेनरेशन गैप को कैसे कम करें?
बच्चे अपने मन की करना चाहते हैं और अपने जीवन के फैसले लेने की आजादी चाहते हैं। वहीं, इंडियन पेरेंट्स बच्चों को अभी भी उतना ही छोटा मानते हैं और उन्हें लगता है कि वो जो कहेंगे वही सही है। यहीं से दोनों के बीच एक गैप बनना शुरू हो जाता है, जिसे कम करना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं आखिर कैसे बच्चे पेरेंट्स के साथ बिना किसी बहस या झगड़े के जेनरेशन गैप कम कर सकते हैं:
बात को सफाई से सामने रखें
पेरेंट्स के सामने अपनी बात कहने के लिए ऐग्रेसिव होने की जरूरत नहीं है, अगर आपकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उसे एक बार शांति से बैठकर समझाने की कोशिश करें।
अपने-अपने अनुभव शेयर करें
बड़ों के पास जितने ज्यादा अनुभव होता है, छोटों के पास तकनीक और नई दुनिया की उतनी ही अच्छी समझ। ऐसे में अगर दोनों ही अपने-अपने अनुभव समय निकालकर एक दूसरे से शेयर करेंगे तो इससे पेरेंट्स को आओने बच्चों की और बच्चों को पेरेंट्स की दुनिया समझने में मदद मिलेगी।
फैमिली ट्रेडिशन का हिस्सा बनें
परिवार के त्योहार और शादी जैसे सभी तरह के ट्रेडिशन में शामिल हों। इससे पुराने कल्चर को न सिर्फ जानने में मदद मिलेगी बल्कि अपनी खामियों के बारे में मालूम होगा।
एक दूसरे की एक्टिविटी में हिस्सा लें
छुट्टी वाले दिन फैमिली के साथ समय बिताते हुए ऐसी एक्टिविटी शामिल करें, जो दोनों ही जेनरेशन से जुड़ी हों। पुराने गेम्स जैसे- कैरम बोर्ड, लूडो, शतरंज और अंताक्षरी के साथ नए वीडियो गेम्स को एक्टिविटी में शामिल करें।
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फीलिंग शेयर करना सीखें
हम अक्सर अपनी भावनाओं को दोस्तों और पार्टनर से तो शेयर कर देते हैं लेकिन ऐसा पेरेंट्स के साथ नहीं करते। ऐसा करना पेरेंट्स को आपको गहराई से समझने में मदद करेगा।
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