Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    डांटने के बजाय बच्चों से करें खुलकर बात, पॉजिटिव पेरेंटिंग से सुधरेगी मेंटल हेल्थ

    By Niharika PandeyEdited By: Harshita Saxena
    Updated: Thu, 09 Jul 2026 05:52 PM (IST)

    पॉजिटिव पेरेंटिंग बच्चे को गाइड करना सिखाती है, उन्हें कंट्रोल करना नहीं। ...और पढ़ें

    बच्चों की परवरिश के लिए अपनाएं ये 5 पॉजिटिव तरीके (Picture Credit- AI Generated)

    बच्चों की परवरिश के लिए अपनाएं ये 5 पॉजिटिव तरीके (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. बच्चों को घर के कामों में शामिल करें, वे करके सीखते हैं

    2. उन्हें अपनी पर्सनैलिटी डेवलप करने का मौका दें, तुलना न करें

    3. गलती पर बिहेवियर को टोकें, बच्चे को शर्मिंदा न करें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पेरेंटिंग स्टाइल का प्रभाव बड़े होने पर भी बना रहता है। यदि आपके बच्चे छोटे हैं और आप उन्हें एक बेहतर एडल्ट के रूप में ढालना चाहते हैं तो उसकी शुरुआत आज से ही करनी होगी। हॉवर्ड वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि पॉजिटिव पेरेंटिंग के आगे चलकर काफी फायदे देखने को मिलते हों।

    बड़े होने पर आपसी रिश्तों, मेंटल हेल्थ और सेहत पर इसका अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है। वैसे तो पेरेंटिंग का कोई भी फॉर्मूला परफेक्ट नहीं होता, लेकिन पॉजिटिव अप्रोच से इसे बेहतर बनाया जा सकता है, आइए जानते हैं कैसे।

    ये पॉजिटिव तरीके सिखा सकते हैं बच्चे को

    • बच्चा करके सीखता है

    यदि बच्चा अपने घर के रोजमर्रा के कामों में शामिल होता है तो वो उससे बेहतर सीख पाता है। परिवार के कामों में हाथ बंटाने और सोशल एक्टविटी में हिस्सा लेने से उनकी स्किल्स डेवलप होती है, आत्मविश्वास और अपनापन बढ़ता है। उन्हें उनकी उम्र के हिसाब से छोटे-छोटे टास्क दें।

    • उन्हें उनके जैसा बनने दें

    आपका बच्चा आपका छोटा वर्जन नहीं है, उन्हें अपनी पर्सनैलिटी डेवलप करने का मौका दें। उन्हें अपने पेरेंट्स की कॉपी बनने के लिए मजबूर ना करें। अपनी बात या फीलिंग खुलकर बताने दें। चाहे कपड़े हों, हेयर स्टाइल या दोस्त उन्हें अपने तरीके से चुनने दें, बस गाइड करें।

    खबरें और भी

    • तुलना सब बिगाड़ सकती है

    यदि आप अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी गलतियां निकाली जा रही हैं। हर बच्चा अलग होता है, उसकी जरूरतें और सोच अलग होती हैं, बस उसे समझने की जरूरत है। हर बक्त उनकी कमिया निकालने की बजाय उन्हें ध्यान से सुनें और समझें।

    • बिहेवियर के लिए टोकें

    गलती करने पर बच्चे को कोई टैग देने की बजाय उस वक्त की गई गलती पर फोकस करें। उनके गलत बिहेवियर के लिए उन्हें समझाएं ना कि उस गलती के आधार पर उसे जज करें।

    • फेल्यिर से ही सीखते हैं

    सिर्फ बच्चे ही नहीं बड़े भी अपनी असफलताओं से सीखते हैं। असफल होने पर बच्चे को शर्मिंदा करने की बजाय सपोर्ट करें, उन्हें फिर से प्रयास करने के लिए प्रेरित करें।

    इनसे भी मिल सकती है मदद

    • बच्चों पर हाथ ना उठाएं, उन्हें सजा देने की बजाय सिखाने की कोशिश करें
    • धमकी नाद दें उन्हें गाइड करें। बच्चा जब सुरक्षित और रेस्पेक्टेड महसूस करता है तभी सीखता है।
    • एक टीम की तरह काम करें, चाहे आप दोनों ही पेरेंटिंग कर रहे हों या फिर सिंगल मॉम या डैड हों
    • बच्चों को ऑनलाइन खतरों के बारे में बताएं
    • स्क्रीन टाइम लिमिट करने के लिए डांटने या धमकाने की बजाय उसकी नेगेटिव चीजों के बारे में बताएं।

    यह भी पढ़ें- अनजाने में कही आप ही तो बच्चों को नहीं बना रहे 'जेंडर बायस्ड'? पेरेंट्स आज ही सुधार लें अपनी ये गलतियां