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    दोस्त तो बहुत हैं, मगर ग्रुप में खुद को पाते हैं लेफ्ट-आउट? इन 3 संकेतों से लगाएं अपनी पोजीशन का पता

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 09:39 AM (IST)

    क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होता है कि आपके पास दोस्तों का एक बड़ा सा ग्रुप है, व्हाट्सएप पर दिन भर ढेरों मैसेज आते हैं, लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर एक अके ...और पढ़ें

    क्या आप भी अपने फ्रेंड ग्रुप में 'साइडलाइन' महसूस करते हैं? (Image Source: AI-Generated)

    क्या आप भी अपने फ्रेंड ग्रुप में 'साइडलाइन' महसूस करते हैं? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भीड़ में खड़े होकर भी ऐसा लगना कि "मेरा यहां क्या काम है?" या "क्या मेरे होने या न होने से इन्हें कोई फर्क पड़ता है?" यह अहसास बहुत अजीब और तकलीफदेह होता है।

    दोस्तों के बीच रहकर भी खुद को अनदेखा महसूस करना यानी 'लेफ्ट-आउट' फील करना आजकल बहुत आम हो गया है। अगर आप भी इस उलझन में हैं कि ग्रुप में आपकी असली जगह क्या है, तो इन 3 साफ संकेतों से आप सच्चाई का पता लगा सकते हैं।

    feeling left out in friend group

    (Image Source: AI-Generated) 

    हमेशा आपके बिना बनते हैं प्लान

    यह सबसे बड़ा और सबसे सीधा संकेत है। वीकेंड पर सबने मिलकर फिल्म देखने या कैफे जाने का प्लान बनाया, लेकिन आपको किसी ने नहीं पूछा। आपको इंस्टाग्राम की स्टोरी या स्नैपचैट देखकर पता चलता है कि दोस्तों ने कितनी मस्ती की। अगर ग्रुप में आपको तभी बुलाया जाता है जब उन्हें आपकी गाड़ी की जरूरत हो, कोई काम हो, या फिर जब कोई और दोस्त मौजूद न हो, तो समझ जाइए कि आप उनकी प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक विकल्प हैं।

    आपकी बातों को कर दिया जाता है अनसुना

    याद कीजिए, जब आप सब साथ बैठे होते हैं, तो क्या आपको अपनी बात पूरी करने का मौका मिलता है? अगर आप कोई मजेदार किस्सा या अपनी कोई परेशानी शेयर करना शुरू करते हैं और बीच में ही कोई और बात काटकर अपना रोना शुरू कर देता है, तो यह एक चेतावनी है। अगर आपकी राय को कोई अहमियत नहीं दी जाती और आप ग्रुप में सिर्फ दूसरों की बातें सुनने वाले एक दर्शक बनकर रह गए हैं, तो ग्रुप में आपकी सोशल पोजीशन बहुत कमजोर है।

    दोस्ती निभाने की सारी जिम्मेदारी सिर्फ आप पर 

    एक छोटा-सा टेस्ट करके देखिए। अगर आप आज से अपने दोस्तों को मैसेज या कॉल करना बंद कर दें, तो कितने लोग सामने से आपका हाल पूछेंगे? अगर जवाब 'शायद एक भी नहीं' है, तो सच्चाई आपके सामने है। दोस्ती हमेशा दोनों तरफ से निभाई जाती है। अगर हर बार मिलने का प्लान आपको ही बनाना पड़ता है, बातचीत की शुरुआत हमेशा आपको ही करनी पड़ती है और उनके रवैये में कोई दिलचस्पी नहीं दिखती, तो इसका सीधा मतलब है कि आप उन पर अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं।

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    क्या करें?

    यह सच्चाई थोड़ी कड़वी जरूर लग सकती है, लेकिन इसे स्वीकार करना आपके ही भले के लिए है। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है, बस आप गलत जगह पर अपनी अहमियत तलाश रहे हैं। खुद को दोष देने या मन छोटा करने के बजाय, अपनी अहमियत पहचानें। 

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