क्या आपका बच्चा भी होमवर्क के लिए एआई से ले रहा है मदद? पेरेंट्स इन आसान तरीकों से सुधारें उनकी आदत
एआई के बढ़ते इस्तेमाल को रोकने के लिए माता-पिता को बच्चों की मेहनत की सराहना करनी चाहिए और उन्हें ईमानदारी सिखाते हुए सही संतुलन बनाना चाहिए। ...और पढ़ें

क्या आपका बच्चा भी एआई से छाप रहा है स्कूल प्रोजेक्ट? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में आज '90% से कम आए तो करियर खत्म' वाला एक खतरनाक माहौल बन चुका है। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के इसी भारी तनाव के कारण, बच्चे प्रोजेक्ट्स और असाइनमेंट्स को सिर्फ एक बोझ समझने लगते हैं। जब हम उन पर केवल ऊंचे नंबर लाने का दबाव बनाते हैं, तो वे अपनी रातों की नींद बचाने के लिए चैटजीपीटी या एआई का शार्टकट ढूंढने पर मजबूर हो जाते हैं। बच्चों की तुलना शर्मा जी या गुप्ता जी के बच्चों से करने के बजाय, उनकी रोज की मेहनत की तारीफ करना सीखें। जब बच्चे को लगेगा कि आपके लिए नंबरों से ज्यादा उसकी ईमानदारी मायने रखती है, तो वह शार्टकट नहीं चुनेगा।

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कागज-पेन की आदत
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब स्कूलों के प्रोजेक्ट्स भी कंप्यूटर पर टाइप होकर या पीपीटी के रूप में जमा होने लगे हैं। इससे बच्चों में केवल 'कंट्रोल+सी' (कॉपी) और 'कंट्रोल+वी' (पेस्ट) करने की आदत बढ़ गई है। इस शार्टकट को रोकने के लिए घर पर नियम बनाएं कि इतिहास का प्रोजेक्ट हो या हिंदी का निबंध, बच्चा पहले उसे रफ कापी में अपने हाथ से लिखेगा। हाथ से लिखने की यह पारंपरिक भारतीय आदत न सिर्फ बच्चे की लिखावट सुधारती है, बल्कि उसके सोचने की क्षमता को भी सक्रिय रखती है। इंटरनेट की चमक-दमक वाली परफेक्ट कापी से आपके बच्चे के हाथ से लिखे टूटे-फूटे शब्द हजार गुना बेहतर हैं।
पूछें आसान सवाल
अक्सर जब बच्चे भारी-भरकम फाइलें और सुंदर चार्ट पेपर बनाकर लाते हैं, तो हम बस दूर से देखकर खुश हो जाते हैं। अब इस आदत को बदलना होगा। रात को खाने की टेबल पर या चाय के समय बच्चे के पास बैठें और एक टीचर या इंटरव्यूअर की तरह प्यार से पूछें— "बेटा, इस बार पर्यावरण दिवस पर जो प्रोजेक्ट बनाया है, उसके बारे में मुझे भी थोड़ा समझाओ।" या "इस पैराग्राफ में जो मुश्किल शब्द है, उसका मतलब क्या है?" अगर बच्चे ने खुद मेहनत की होगी, तो वह पूरे उत्साह के साथ जवाब देगा। लेकिन अगर उसने एआई से पूरा का पूरा पैराग्राफ हुबहू छापा होगा, तो वह झिझकेगा और उसका यह डिजिटल झूठ तुरंत आपके सामने आ जाएगा।
सही इस्तेमाल सिखाएं
एआई कोई विलेन नहीं है, बल्कि यह आज की तकनीक है। सीबीएसई खुद अब कक्षा 3 से ही बच्चों को एआई और कंप्यूटर थिंकिंग का सही पाठ पढ़ा रहा है। इसलिए, बच्चों को एआई से दूर भगाने के बजाय उन्हें इसका सही इस्तेमाल सिखाएं। उन्हें समझाएं कि वे गणित का कोई कठिन फार्मूला समझने, इतिहास की कोई कहानी जानने या अपनी अंग्रेजी की ग्रामर सुधारने के लिए एआई की मदद जरूर लें। लेकिन काम पूरा होने के बाद वे स्कूल की फाइल में यह साफ-साफ लिखें कि उन्होंने किस टापिक के लिए इंटरनेट या एआई की मदद ली है। बचपन से सीखी गई यह ईमानदारी उन्हें भविष्य के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाएगी।
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हो सही संतुलन
सर्वोत्तम इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की अध्यापिका प्रिया रावत कहती हैं, 'वर्तमान में छात्रों की एआइ पर अत्यधिक निर्भरता कुछ अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है, किंतु एआई को पूर्णतः नकारा नहीं जा सकता, बच्चों को यह स्वतंत्रता दें कि वे एआइ की संतुलित एवं सीमित सहायता ले सकते हैं। बच्चों की शिक्षा एवं शैक्षिक प्रगति में सहभागिता एवं रुचि दिखाएं। बचपन से ही बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की भी आदत डलवाएं। बच्चों को लेखन एवं वाचन द्वारा विचारों को प्रकट करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों को समझाएं कि एआइ का अत्यधिक प्रयोग रचनात्मकता एवं मौलिकता को नष्ट कर देता है। बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित करें। सबसे महत्त्वपूर्ण बच्चों के लिए उदाहरण बनें, स्वयं भी अपने कार्यों को मौलिक रूप से करने का प्रयास करें। '
5 मिनट का स्मार्ट फार्मूला
- गैजेट-फ्री टाइम: जब बच्चा घर पर पढ़ाई या होमवर्क कर रहा हो, तो उसका फोन और टैबलेट अपने पास जमा कर लें।
- रफ ड्राफ्ट मांगें: बच्चे के फाइनल स्कूल प्रोजेक्ट को देखने से पहले उसके हाथ से लिखे शुरुआती रफ नोट्स, स्केच या विचार जरूर देखें।
- स्मार्टफोन पर नजर: हफ्ते में एक बार बच्चे के लैपटाप या मोबाइल की ब्राउजिंग हिस्ट्री पर दोस्तों की तरह और प्यार से नजर डालें कि वह किन वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहा है।
- सच्चाई को इनाम: अगर बच्चा खुद आकर मान जाए कि उसे कोई सवाल नहीं आ रहा था और उसने एआई की मदद ली, तो गुस्सा होने के बजाय उसकी ईमानदारी की तारीफ करें और उसे सही तरीका समझाएं।
- खुद बनें रोल मॉडल: बच्चों के सामने खुद भी हर छोटी समस्या का समाधान तुरंत गूगल या चैटजीपीटी पर ढूंढने के बजाय कोई किताब पढ़ने, आपस में चर्चा करने या गहराई से सोचने की आदत डालें।
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