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    बच्चों से जरूरत से ज्यादा फ्रेंडली होना कहीं न बना दे उन्हें जिद्दी, पेरेंट्स ऐसे बनाएं दोस्ती और डिसिप्लिन में बैलेंस

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 12:37 PM (IST)

    कई बार होता यह है कि बच्चों के साथ माता या पिता का जरूरत से ज्यादा फ्रेंडली होना उनपर ही भारी पड़ने लगता है। ...और पढ़ें

    बच्चों से दोस्ती और अनुशासन के बीच बैलेंस बनाने के टिप्स (Image Source: AI Generated)

    बच्चों से दोस्ती और अनुशासन के बीच बैलेंस बनाने के टिप्स (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पेरेंटिंग एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे उम्रभर निभाना पड़ता है। फिर इसपर बच्चों को डिसिप्लिन में रखना और संस्कार सिखाना माता-पिता की सबसे बड़ी चुनौती भी है। कई बार होता यह है कि बच्चों के साथ माता या पिता का जरूरत से ज्यादा फ्रेंडली होना उनपर ही भारी पड़ने लगता है क्योंकि बच्चे जिद्दी हो जाते हैं और कोई बात सीरियस नहीं लेते। ऐसे में बच्चों से दोस्ती और अनुशासन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, इसके लिए कुछ बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। 

    बच्चों से दोस्ती और अनुशासन के बीच संतुलन कैसे बनाएं? 

    बच्चों से दोस्ती करना उन्हें सहज करने के लिए जरूरी है ताकि वो अपने मन की उलझन बेझिझक शेयर कर सकें, लेकिन यह दोस्ती इतनी नहीं होनी चाहिए कि उन्हें डिसिप्लिन में ही न रखा जा सके। ऐसे कई तरीके हैं जिन्हें फॉलो किया जा सकता है: 

    1. सबसे पहले कनेक्शन बनाएं 

    बच्चों को डिसिप्लिन सिखाने से पहले कनेक्शन बनाना जरूरी है, उन्हें यह एहसास दिलाएं कि आप हर परिस्थिति में उनके साथ हैं। उनके साथ समय बिताने का एक शेड्यूल फिक्स करें, जिससे क्वालिटी टाइम के साथ उन्हें डिसिप्लिन का मतलब भी अपने आप समझ में आए। 

    1. पर्सनल स्पेस और निगरानी दोनों जरूरी 

    बच्चों से फ्रेंडली हैं तो उन्हें पर्सनल स्पेस देना भी जरूरी है, पर यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें अभी निगरानी की सख्त जरूरत है निगरानी उनकी परवरिश का हिस्सा है, लेकिन उन्हें यह एहसास न होने दें कि आप हर समय उन्हें मॉनिटर कर रहे हैं। वहीं, सवाल भी ऐसे होने चाहिए जो उनपर नेगेटिव इंप्रेशन न डालें। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे कहीं जा रहे हैं तो आपके सवाल ऐसे हों जो पूछताछ की तरह न लगें। 

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    1. गलती पर सख्त डांट से बचें 

    वो बच्चे हैं इसलिए गलतियां करते हैं, ऐसे में उन्हे सख्त डांट की नहीं बल्कि उसे सुधारने वाली डांट की जरूरत है। उनकी गलती पर पेरेंट्स का गुस्सा करना या हाथ उठा देना मेंटल हेल्थ पर असर डाल सकता है। स्थिति को शांत मन से संभाले और बच्चे को गलती पर सिखाने पर जोर दें। 

    1. अपने और बच्चे का रूटीन सख्ती से फॉलो करें

    बच्चों के साथ समय बिताने के साथ ही अपने रूटीन को भी सख्ती से फॉलो करें। समय पर उठने से लेकर फिक्स टाइम पर खाना खाने और सोने तक, एक ही रूटीन फॉलो करें। 

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