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    डेटिंग ऐप्स से ब्रेकअप: अब इंटरनेट पर नहीं, रियल वर्ल्ड में प्यार तलाश रहे जेन-जी; लेकिन क्यों?

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 04:24 PM (IST)

    पिछले एक दशक में डेटिंग ऐप्स ने पार्टनर ढूंढने के तरीके को बदला था, लेकिन अब जेन-जी इनसे ऊब चुकी है। वे डिजिटल थकान, और मीनिंगफुल रिश्तों की इच्छा के ...और पढ़ें

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    क्यों डेटिंग ऐप्स से दूर जा रही है जेन-जी? (Picture Courtesy: AI Generated Image)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पिछले एक दशक में डेटिंग ऐप्स ने हमारे पार्टनर ढूंढने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया था। लेकिन अब जेन-जी इन ऐप्स से ऊब चुकी है।

    लेफ्ट और राइट स्वाइप की दुनिया को पीछे छोड़कर यह पीढ़ी अब असली दुनिया यानी रियल वर्ल्ड में पार्टनर तलाशना ज्यादा पसंद कर रही है। लेकिन डिजिटल दुनिया की इस सबसे एक्टिव जेनरेशन का डेटिंग ऐप्स से मोहभंग क्यों हो रहा है? आइए इसके पीछे के कारणों को समझते हैं।

    डिजिटल थकान और बर्नआउट

    दिन भर स्क्रीन पर रहने के बाद, अब युवा प्रेम के लिए भी स्क्रीन का सहारा नहीं लेना चाहते। लगातार अनजान प्रोफाइल को देखना, उनसे बात शुरू करना और फिर अक्सर बिना किसी नतीजे के बात खत्म हो जाना, मानसिक रूप से थकाने वाला अनुभव बन गया है। जेन-जी अब डेटिंग ऐप बर्नआउट का शिकार हो रही है, जहां स्वाइप करना एक भारी काम जैसा लगने लगा है।

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    (Picture Courtesy: AI Generated Image)

    हकीकत की तलाश

    डेटिंग ऐप्स पर अक्सर लोग अपनी बेहतरीन और कई बार फिल्टर्ड छवि पेश करते हैं। जेन-जी एक ऐसी पीढ़ी है जो प्रामाणिकता को बहुत महत्व देती है। असली दुनिया में किसी से मिलना आपको उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनके बोलने के तरीके और उनकी असली पर्सनालिटी को समझने का मौका देता है। ऐप्स पर मिलने वाली परफेक्ट प्रोफाइल अक्सर हकीकत में वैसी नहीं निकलतीं, जिससे निराशा हाथ लगती है।

    सिचुएशनशिप और कमिटमेंट का डर

    डेटिंग ऐप्स ने विकल्पों की एक ऐसी बाढ़ ला दी है, जिसने रिश्तों की गहराई को कम कर दिया है। इसे चॉइस पैराडॉक्स कहा जाता है, यानी जब आपके पास बहुत ज्यादा ऑप्शन होते हैं, तो आप किसी एक पर टिक नहीं पाते। जेन-जी अब मीनिंगफुल और गहरे संबंधों की तलाश में है, जो अक्सर एक जैसी रुचियों या मुलाकातों से शुरू होते हैं।

    असली दुनिया में पार्टनर ढूंढने के नए तरीके

    अब युवा पार्टनर ढूंढने के लिए तकनीक के बजाय कम्युनिटी का सहारा ले रहे हैं-

    • हॉबी क्लब और क्लासेस- बुक क्लब, कुकिंग क्लास, या पेंटिंग वर्कशॉप्स में ऐसे लोग मिलते हैं जिनकी रुचियां आपसे मिलती हैं।
    • स्पोर्ट्स और फिटनेस- रनिंग क्लब्स या जिम में मिलना अब डेटिंग ऐप्स का एक बड़ा ऑप्शन बनकर उभरा है।
    • सोशल इवेंट्स- दोस्तों की पार्टियों या शादियों में मिलने वाले ऑर्गेनिक कनेक्शन को अब ज्यादा विश्वसनीय माना जा रहा है।

    सुरक्षा और मानसिक शांति

    डेटिंग ऐप्स पर कैटफिशिंग यानी झूठी पहचान और घोस्टिंग यानी बिना बताए गायब हो जाने जैसी समस्याएं आम हैं। आमने-सामने की मुलाकात में सुरक्षा का एहसास होता है और आपसी सम्मान की संभावना भी बढ़ जाती है। असली दुनिया में लोग एक-दूसरे को लेकर जवाबदेह महसूस करते हैं।