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    22 सालों से नहीं तोड़ पाया कोई इस छोटे से गांव का वर्ल्ड रिकॉर्ड, आज भी है एशिया का सबसे साफ गांव

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 04:00 PM (IST)

    इन्हीं हरी-भरी जगहों में एक जगह ऐसी भी है जो हरियाली से ज्यादा अपनी सफाई के लिए पूरी दुनिया में पॉपुलर है। ...और पढ़ें

    एशिया का सबसे साफ गांव मावलिननॉन्ग (Image Source: AI Generated)

    एशिया का सबसे साफ गांव मावलिननॉन्ग (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। घूमना-फिरना लोगों का शौक बन चुका है, शहरों की भीड़ से दूर पहाड़ों पर जाना और फिर वहां से प्रकृति के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाना, इन दिनों आम बात है। इन्हीं हरी-भरी जगहों में एक जगह ऐसी भी है जो हरियाली से ज्यादा अपनी सफाई के लिए पूरी दुनिया में पॉपुलर है। हम बात कर रहे हैं मेघालय के मावलिननॉन्ग नामक गांव की। 

    एशिया का सबसे साफ गांव मावलिननॉन्ग 

    भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और सात बहनों में शामिल मेघालय में मावलिननॉन्ग नामक गांव है जो शिलांग से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बताते चलें कि यह गांव पूरे एशिया में सबसे स्वच्छ माना जाता है, यही वजह है कि इस गांव को ईश्वर का अपना बगीचा नाम दिया गया। इनमें भी सबसे हैरान कर देने वाली बात है कि यह गांव बीते 22 सालों से इस लिस्ट में टॉप पर बना हुआ है। यहां न कोई सफाई कर्मचारी है और न ही इतना साफ-सफाई पर ध्यान देने वाला कोई प्रशासन, इसके बावजूद मावलिननॉन्ग गांव की स्वच्छता बनी हुई है। 

    सोच ने बनाया वर्ल्ड रिकार्ड 

    अब मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर कैसे बिना किसी देखरेख के इस गांव में इतनी सफाई बनी हुई है? तो इसका जवाब है गांव के लोगों की सोच। दरअसल, इस गांव में हर एक व्यक्ति बच्चों से बुजुर्ग तक, सभी पर साफ-सफाई की जिम्मेदारी है। लोग इधर-उधर कचरा नहीं फेंकते हैं और जगह-जगह बांस से बने डस्टबिन लगे हुए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस गांव के लोगों की परंपरा में ही साफ-सफाई रखना है।  

    मैगजीन से  मिली दुनियाभर में पॉपुलैरिटी 

    मेघालय का यह खूबसूरत गांव तब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना, जब साल 2003 में डिस्कवरी इंडिया मैगजीन ने इसे भारत का सबसे स्वच्छ गांव घोषित किया। हालांकि, इससे पहले मावलिननॉन्ग जरूर गुमनामी में जी रहा था लेकिन यहां उसी तरह की स्वच्छता बरकरार थी। 

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    खासी जनजाति करती है निवास 

    मावलिननॉन्ग की साफ-सफाई के अलावा यह गांव खासी जनजाति के लिए भी फेमस है। जी हां, वही जनजाति जहां महिला प्रधान परंपरा को फॉलो किया जाता है। जान लेने वाली बात यह है कि इस समुदाय में मां घर की मुखिया होती है और प्रॉपर्टी मां से घर की सबसे छोटी बेटी को ट्रांसफर होती है।