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    बाबर ने कहा था 'हिंद के किलों का मोती'! पढ़ें भारत का 'जिब्राल्टर' कहलाने वाले ग्वालियर किले की पूरी कहानी

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 05:00 PM (IST)

    ग्वालियर का किला, जिसे बाबर ने 'हिंद के किलों का मोती' कहा था और 'भारत का जिब्राल्टर' भी कहते हैं, अपनी खूबसूरती और गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है ...और पढ़ें

    क्यों इतना खास है ग्वालियर का किला? (Picture Courtesy: incredibleindia)

    क्यों इतना खास है ग्वालियर का किला? (Picture Courtesy: incredibleindia)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में एक से बढ़कर एक ऐसे किले हैं, जो अपनी खूबसूरती और इतिहास के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश में स्थित ग्वालियर का किला। ये किला इतना खास है कि मुगल सम्राट बाबर ने इसे हिंद के किलों का मोती कहा था। 

    अपनी दीवारों में कई राजाओं की गौरव गाथा को समेटे यह किला आज भी शान से खड़ा है और भारत का जिब्राल्टर भी कहा जाता है। इस किले को ये नाम देने के पीछे इसकी अभेद्य दीवारें और राजनीतिक इतिहास छिपा है। आइए आज भारत के इसी गौरवशाली किले के बारे में जानते हैं।  

    Gwalior Fort (1)

    (Picture Courtesy: incredibleindia)

    ग्वालियर के किले का इतिहास

    ऐसा माना जाता है कि इस किले का निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा सूरज सेन ने करवाया था। इस किले की बाहरी दीवारें 35 फीट ऊंची और दो मील लंबी है। इसलिए ये भारत के सबसे अजेय किलों में से एक माना जाता है। वक्त के साथ यह किला कई राजाओं, मुगल सम्राटों और अंग्रेजों के अधीन रहा। राजा सूरज सेन के बाद इस किले पर पाल वंश का शासन रहा, उसके बाद प्रतिहार, तोमर, कछवाहा, लोधी, मुगल, मराठा और अंग्रेजों ने इस किले पर शासन किया। इन सभी ने किले की बनावट और इतिहास पर अपनी छाप छोड़ी है। 

    इस किले ने कई आक्रमण भी सहे, जिसकी गवाही इसकी दीवारें आज भी देती हैं। मोहम्मद गोरी से लेकर इल्तुतमिश जैसे कई मुगल सुल्तानों ने इस किले पर आक्रमण किए। इन आक्रमणों में किले की कई मूर्तियों को नुकसान भी पहुंचा, लेकिन इन सबके बावजूद ये किला आज भी शान से खड़ा है। इसलिए इस किले को देखने आज भी दूर-दूर से लोग आते हैं। 

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    Gwalior Fort (2)

    (Picture Courtesy: Facebook)

    यह किला इतना खास क्यों है?

    ये किला सिर्फ अपनी अभेद्य दीवारों के लिए खास नहीं है। युद्ध के अलावा इसके पीछे कई रणनीतिक कारण भी हैं। यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है। इस किले की दीवारों की ऊंचाई लगभग 35 फीट खड़ी चट्टान जैसी है। इस वजह से दुश्मनों के लिए इस किले पर जीत हासिल करना नामुमकिन था। 

    इस किले पर कई शासकों का राज रहा है, जो अलग-अलग धर्म और संस्कृति को मानते थे। इसलिए इस किले के अंदर हिंदू, राजपूत और इस्लामी वास्तुकला का मिला-जुला नजारा देखने को मिलता है।

    किले के मुख्य आकर्षण क्या हैं?

    किले के अंदर कई खूबसूरत महल, मंदिर और पानी के कुंड मौजूद हैं, जो अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस किले के अंदर का मान सिंह महल है, जिसका निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने करवाया था। इस महल की दीवारों पर बत्तखों, हाथियों और मोरों की आकृतियां बनाई गई थीं, जो आज भी उतनी ही खूबसूरत लगती हैं। राजा मानसिंह की प्रेम कहानी की निशानी गुजरी महल की भी अपनी खासियत है। राजा ने इसे अपनी रानी के लिए बनवाया था, जिसे अब संग्राहलय में बदल दिया गया है। 

    Gwalior Fort (3)

    (Picture Courtesy: Facebook)

    इसके अलावा, किले के अंदर सास-बहू मंदिर है, जो अपनी खूबसूरत नक्काशी के लिए मशहूर है। किले के अंदर तेली का मंदिर भी है, जो नागर और द्रविड़ शैली के मेल से बना है। माना जाता है कि ग्वालियर के किले में मुगल सम्राट जहांगीर ने सिखों के 6वें गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब जी को दो साल तक कैद करके रखा था। कहा जाता है कि उन्होंने अपने साथ 52 हिंदू राजाओं को भी रिहा करवाया था। उन्हीं के स्मारक के रूप में दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा बनाया गया। इस किले की चढ़ाई के रास्ते में चट्टानों को काटकर बनाई गईं जैन तीर्थकरों की विशाल मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं।