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    सिर्फ कामुकता समझते हैं खजुराहो का मतलब? दीवारों पर उकेरी गई इन कलाओं का 'असली सच' कर देगा हैरान

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 04:57 PM (IST)

    खजुराहो के मंदिर सिर्फ कामुकता को नहीं, बल्कि सामान्य जीवन, इंसानों की भावनाओं, अध्यात्म और युद्ध कला को भी दिखाते हैं। ...और पढ़ें

    खजुराहो के मंदिरों की खूबसूरत नक्काशी (Picture Courtesy: Freepik)

    खजुराहो के मंदिरों की खूबसूरत नक्काशी (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो के मंदिर दुनियाभर में अपनी वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। हालांकि, इससे जुड़ी एक आम धारणा है कि खजुराहो के मंदिरों में सिर्फ कामुक (Erotic) और कामसूत्र से जुड़ी नक्काशियां हैं, लेकिन ये सिर्फ आधा सच है। 

    खजुराहो के मंदिर की दीवारों पर कामुक नक्काशियां की मौजूद हैं, लेकिन ये नक्काशी सिर्फ 10-15% हिस्सा ही है। बाकी की नक्काशी उस दौर के सामान्य जीवन और अध्यात्म से जुड़ी हैं। आइए जानें खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पर आप किस-किस तरह की नक्काशी देख सकते हैं।

    चंदेल वंश ने करवाया था खजुराहो के मंदिरों का निर्माण

    9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच खजुराहो चंदेल वंश की राजधानी था। इसी दौरान यहां हिंदू और जैन धर्म  के 85 मंदिर बनवाए गए थे। इनमें से कई मंदिर मुगल अक्रांताओं ने तोड़ दिए थे और आज इनमें से सिर्फ 20 मंदिर ही बचे हैं। खजुराहो के मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं और अपनी खूबसूरत नक्काशी के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इनमें सबसे मशहूर कामुक नक्काशियां ही हैं, जिनसे जोड़कर लोग खजुराहो के मंदिरों को देखते हैं। 

    सामान्य जीवन की झलक 

    खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पर उस दौर के सामान्य जीवन की झलक देखने को मिलती है। बड़ी की बारीकी के साथ लोगों को उनके रोजमर्रा के काम करते हुए उकेरा गया है। महिलाओं को बाल सुखाते, आईने में खुद को देखते, आंखों में काजल लगाते, पैरों से कांटा निकालते, बच्चों को खिलाती मां, आपस में बातचीत करते लोग, ढोलक और वीणा बजाते संगीतकार, इन धुनों पर थिकरती नृत्यांगनाओं को इन मंदिरों की दीवारों पर उकेरा गया है।  

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    धर्म, अध्यात्म और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं

    खजुराहो में हिंदू और जैन, दोनों ही धर्मों के मंदिर हैं। इन मंदिरों की नक्काशी का बड़ा हिस्सा भक्ति और अध्यात्म से जुड़ा है। भगवान शिव, गणेश, विष्णु, ब्रह्मा, सूर्य देव, मां जगदम्बा और कई देवी-देवताओं के अलग-अलग रूपों की नक्काशीदार प्रतिमाएं खजुराहो में मौजूद हैं। 

    कंदरिया महादेव और लक्ष्मण मंदिर जैसे मंदिरों में मोक्ष, धर्म और भक्ति के मार्गो को पत्थरों पर बहुत खूबसूरती से उकेरा गया है। जैन मंदिरों में जैन तीर्थंकरों की शांत और ध्यान मुद्रा में मूर्तियां बनी हैं। 

    Khajuraho Temple (4)

    (Picture Courtesy: Freepik)

    युद्ध, सेना और राजाओं का वैभव

    खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पर चंदेल साम्राज्य की वीरता को भी बहुत खूबसूरती के साथ उकेरा गया है। हाथियों और घोड़ों पर सवार सैनिक, युद्ध के मैदान के दृश्य, शिकार और अस्त्र-शस्त्र के साथ योद्धाओं की नक्काशी खजुराहो के मंदिरों को और भी सुंदर बनाते हैं। 

    अपसराओं की खूबसूरती

    खजुराहो की दीवारों पर सुंदर अपसाराओं को भी बहुत ही बारीकी से नक्काशी करके पत्थरों में उकेरा गया है। इनके शरीर पर खूबसूरत गहने उकेरे हुए हैं और शरीर की बनावट भी बहुत खूबसूरत बनाई गई है। इन नक्काशियों में वे बाल संवारती, नाचते-गाते और रोज के जीवन को जीते हुए दिखाया गया है।  

    कामुक नक्काशी

    खजुराहो के मंदिरों की दीवारों पर कामुकता दिखाती हुई नक्काशी भी मौजूद है। इसमें स्त्री-पुरुष अलग-अलग मेटिंग पोजीशन में नजर आते हैं।इन नक्काशियों में अनेचुरल सेक्स की भी झलक देखने को मिलती है, जिसके साथ अपराधबोध और मिलने वाली सजा को भी दिखाया गया है, जो बताता है कि उस समय भी पशुओं या किसी भी तरह का अनेचुरल सेक्स करने की मनाही थी। 

    खजुराहो के मंदिरों से जुड़ी कहानी

    इन मंदिरों से जुड़ी एक लोक कहानी है कि एक ब्राह्मण की एक बेटी थी, जिसका नाम था हेमवती। वह बहुत खूबसूरत थी और उसकी खूबसूरती से चंद्र देव मोहित हो गए थे। उन दोनों का एक पुत्र हुआ चंद्रवरमन, जिसने आगे चलकर चंदेल वंश की स्थापना की। कहा जाता है कि एक दिन हेमवती चंद्रवरमन के सपने में आईं और उनसे ऐसे मंदिर बनाने के लिए कहा, जो मानवीय भावनाओं के पूरे दायरे को दर्शाते हों।  

    इसलिए खजुराहो के मंदिरों पर बनी कामुक नक्काशियों के पीछे दो कारण माने जाते हैं। पहला कि उन्हें एक इंसान के जीवन की सभी भावनाओं को दर्शाने के लिए बनाया गया था। दूसरा ये कि उस समय चंदेल साम्राज्य में तंत्र विद्या काफी प्रचलित थी और इस सिद्धि को हासिल करने के लिए शारीरिक संबंध बनाना जरूरी माना जाता था। ऐसा माना जाता है कि खजुराहो की दीवारों पर सिद्धि हासिल करने वाले उन्हीं लोगों की मेटिंग पोजीशन देखने को मिलती है।