हरिद्वार की आरती से केदारनाथ धाम तक: यूं ही नहीं उत्तराखंड कहलाता है देवभूमि, दिल जीत लेगी यहां की खूबसूरती
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ...और पढ़ें

क्यों है उत्तराखंड इतना खास? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, अध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृति विरासत के कारण उत्तराखंड पूरी दुनिया में मशहूर है।
गढ़वाल और कुमाऊ मंडल में बंटा ये राज्य प्रकृति प्रेमियों और अध्यात्म की ओर रुचि रखने वाले लोगों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। आइए जानें उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, कला, संस्कृति और खान-पान के बारे में, जो इस राज्य को इतना खास बनाती हैं।
खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल
उत्तराखंड में जिस ओर नजर घुमाएंगे, आपको प्रकृति की खूबसूरती का दीदार करने का मौका मिलेगा। एक ओर केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसी जगहें अध्यात्मिक शांति का एहसास करवाती हैं, वहीं ऋषिकेश और हरिद्वार गंगा आरती और योग केंद्रों के लिए मशहूर हैं।
इसके अलावा, नैनीताल की झीलें, मसूरी की मनमोहक पहाड़ियां, औली की बर्फ से ढ़की ढलानें और फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए उत्तराखंड के मुख्य आकर्षण हैं। इन जगहों पर ट्रेकिंग, स्कींग और बोटिंग जैसी एक्टिविटीज का मजा लिया जा सकता है।
देवभूमिक की लोक संस्कृति
उत्तराखंड की संस्कृति यहां के संगीत, नृत्य और पारंपरिक उत्सवों में बसा है। यहां की संस्कृति संगीत, नृत्य और पारंपरिक उत्सवों से सजा हुआ है। झूमैलो, थड़िया, छोलिया और पांडव नृत्य यहां के लोकनृत्य हैं, जो किसी भी शुभ अवसर या त्योहार पर ढोल-दमाऊ की थाप पर किए जाते हैं। फूलदेई, हरेला और इगास-बग्वाल जैसे त्योहार उत्तराखंड में काफी धूमधाम से मनाए जाते हैं।
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कला और हस्तशिल्प
कुमाऊं की पारंपरिक लोक कला ऐपण आर्ट है, जिसमें लाल मिट्टी पर चावल के घोल से खूबसूरत ज्यामितीय आकृतियां बनाई जाती हैं। यहां के पुराने घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर लकड़ी की बारीक नक्काशी देखने को मिलती है, जो इस राज्य की वुड कार्विंग कला का उदाहरण हैं। अल्मोड़ा का तांबे का शिल्प, रिंगाल से बनी टोकरियां और मुन्स्यारी की हाथ से बनी कालीन दुनियाभर में मशहूर हैं।
उत्तराखंड का लजीज खान-पान
उत्तराखंड का खान-पान भी काफी खास है। पहाड़ी इलाका होने की वजह से यहां का खान-पान शरीर को गर्म रखने और एनर्जी देने वाला होता है। मडुआ की रोड़ी, झंगोरा की खीर और गहत की दाल यहां के पारंपरिक व्यंजन हैं।
इनके अलावा, काफली, आलू के गुटके और चैंसू भी यहां के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा हैं। उत्तराखंड की बाल मिठाई और सिंगोरी का स्वाद भी लाजवाब होता है, जिन्हें एक बार खाकर आप कभी नहीं भूलेंगे।