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    कच्छ के रण में छिपा 'कालो डूंगर': जहां उल्टी दिशा में चलने लगती हैं गाड़ियां, हैरान कर देगा इसका रहस्य

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 02:56 PM (IST)

    सफेद नमक वाले रेगिस्ताने के बीच खड़ा है एक काला सा पहाड़ा जिसका नाम है कालो डूंगर। ...और पढ़ें

    कालो डूंगर की कहानी (Image Source: AI Generated)

    कालो डूंगर की कहानी (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात के उत्तर पश्चिम में स्थित कच्छ का रण अपने खारेपन के लिए दुनियाभर में जाना जाता है और इसी सफेद नमक वाले रेगिस्ताने के बीच खड़ा है एक काला सा पहाड़ा जिसका नाम है कालो डूंगर। हम आज कालो डूंगर के बारे में इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि इसका इतिहास बहुत पुराना है। 

    कालो डूंगर: कच्छ के रण का सबसे ऊंचा स्थान 

    गुजरात के रण में खावड़ा गांव के उत्तर में स्थित कालो डूंगर नामक काली पहाड़ी कच्छ का सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है। यह पहाड़ करीब 462 मीटर ऊंचा है जबकि समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1516 फीट की है। इस जगह से रण का शानदार नजारा लिया जा सकता है। 

    कालो डूंगर की कहानी 

    वैसे तो घूमने के लिए कच्छ का रण अक्सर सुर्खियों में रहता है, खासकर संक्रांति के मौके पर यहां पतंगबाजी का खास आयोजन होता है। पर बहुत कम लोग यहां मौजूद कालो डूंगर की कहानी के बारे में जानते हैं। दरअसल, यह पहाड़ी भगवान दत्तात्रेय को समर्पित 400 साल पुराने मंदिर के लिए पॉपुलर है। इससे जुड़ी पौराणिक कहानी की बात करें तो भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के तीन सिर वाले अवतार भगवान दत्तात्रेय जब पृथ्वी का भ्रमण करने निकले तो कालो डूंगर रुके। वहां भूख से तड़प रहे गीदड़ को देख भगवान दत्तात्रेय ने अपना शरीर उन्हें सौंप दिया। गीदड़ जितनी बार उनका शरीर खाते, वह फिर से बन जाता। इसी वजह से इस मंदिर में आने वाले टूरिस्ट गीदड़ों को आज तक खाना खिलाते हैं।  

    कालो डूंगर का रहस्य और सच 

    कालो डूंगर के एक रहस्य की भी बात की जाती है और वो है इसकी मेग्नेटिक रोड है। यह जगह अपने एंटी मेग्नेटिक की वजह से लोगों के बीच खूब पॉपुलर रहती है। ऐसा कहा जाता है कि कालो डूंगर के खास एक खास जोन में अगर गाड़ी न्यूट्रल गियर में खड़ी रहे तो वह ढलान के उल्टी दिशा में चलने लगती है। लेकिन आईआईटी कानपुर की एक रिसर्च ने इस रहस्य से पर्दा उठाया और बताया कि यह ऑप्टिकल इल्यूजन यानी केवल नजर का भ्रम है। ऐसा इसलिए क्योंकि आसपास की ढलान और वहां की भौगिलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि सड़क असल में नीचे होती है पर नजरों को धोखा होने लगता है कि वह ऊपर की तरफ जा रही है। 

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