बारिश पसंद है, तो घूम आएं भारत का यह गांव; यहां जमीन को छूते हैं बादल और हर तरफ दिखते हैं झरने ही झरने
बारिश का मौसम भला किसे पसंद नहीं होता है? जब पहाड़ हरी चादर ओढ़ लेते हैं, झरने पूरे वेग से बहते हैं और नदियां लबालब भर जाती हैं, तो प्रकृति का नजारा ह ...और पढ़ें

मानसून में जन्नत बन जाता है मेघालय का गांव (Image Source: Instagram)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बारिश का मौसम प्रकृति को एक नई जान दे देता है। हरियाली से लदे पहाड़ और तेज बहते झरने किसी का भी मन मोह सकते हैं, लेकिन अगर आपको बारिश का असली रोमांच महसूस करना है, तो मेघालय का रुख जरूर करना चाहिए।
दरअसल, यहां खासी पहाड़ियों के बीच 'मौसिनराम' नाम का एक ऐसा खूबसूरत गांव बसा है, जिसका नाम दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाले स्थान के तौर पर दर्ज है। इसे ही 'Monsoon Capital Of India' कहा जाता है। आइए जानते हैं इस शानदार जगह के बारे में कुछ खास बातें।

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मौसिनराम में ही क्यों होती है इतनी बारिश?
मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में मौजूद इस गांव की भौगोलिक बनावट ही इसे इतना खास बनाती है। दरअसल, बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी भरी हवाएं जब इस तरफ आती हैं, तो यहां की पहाड़ियां उन हवाओं को ऊपर की ओर धकेल देती हैं। इसी वजह से यहां भयंकर बारिश होती है।
खासतौर पर जून से सितंबर के बीच, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वजह से यहां लगातार और मूसलाधार पानी बरसता है। इस दौरान यहां तैरते हुए बादल, ऊंचे-ऊंचे झरने और चारों तरफ पसरी हरियाली पर्यटकों को अपना दीवाना बना देती है।
यहां दर्ज हैं दुनिया की सबसे ज्यादा बारिश के रिकॉर्ड
जब भी मेघालय की बात होती है, तो चेरापूंजी का जिक्र जरूर आता है। मौसिनराम से चेरापूंजी की दूरी महज 15 किलोमीटर है। एक समय था जब दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश का ताज चेरापूंजी के पास था।
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आज भी एक महीने या एक साल के अंदर सबसे ज्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड इसी जगह के नाम है, लेकिन अगर हम 'औसत वार्षिक वर्षा' की बात करें, तो वर्तमान में यह रिकॉर्ड मौसिनराम के नाम है। यही वजह है कि प्रकृति प्रेमी जब मेघालय आते हैं, तो इन दोनों ही जगहों को एक साथ घूमना पसंद करते हैं।

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यहां घूमने के लिए क्या-क्या है खास?
रिकॉर्ड तोड़ बारिश के अलावा, यह इलाका अपने शानदार पर्यटन स्थलों के लिए भी दुनियाभर में लोकप्रिय है:
- मावजिम्बुइन गुफा: यह प्राकृतिक गुफा अपने भीतर मौजूद स्टैलेग्माइट आकृतियों के लिए जानी जाती है, जो पर्यटकों को काफी रोमांचित करती हैं।
- नोहकलिकाई फॉल्स: सोहरा के पास स्थित यह झरना भारत के सबसे ऊंचे और खूबसूरत झरनों में गिना जाता है।
- सेवन सिस्टर्स फॉल्स: प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह झरना मानसून के दौरान अपने सबसे विकराल और मनमोहक रूप में होता है।
- लिविंग रूट ब्रिज: यहां की स्थानीय जनजातियों ने पेड़ों की जीवित जड़ों को आपस में गूंथकर जो प्राकृतिक पुल तैयार किए हैं, वे इंजीनियरिंग का एक जीता-जागता अजूबा हैं।
- खूबसूरत व्यू प्वाइंट्स: यहां ऐसे कई प्वाइंट्स हैं, जहां से आप धुंध में लिपटी हरी-भरी घाटियों का जादुई नजारा देख सकते हैं।

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क्या है ट्रिप प्लान करने का सही समय?
- मानसून का मजा: अगर आप बादलों और झरनों को करीब से देखना चाहते हैं, तो जून से सितंबर के बीच आएं। हालांकि, इस मौसम में छाता, वॉटरप्रूफ कपड़े और रेनकोट हमेशा अपने साथ रखें।
- शांत और साफ मौसम: अगर आप तेज बारिश से बचना चाहते हैं और सुहावने मौसम में घूमना पसंद करते हैं, तो अक्टूबर से फरवरी का समय आपकी यात्रा के लिए सबसे बेहतरीन रहेगा।
कैसे पहुंचें मौसिनराम?
इस खूबसूरत गांव तक पहुंचना काफी आसान है:
- फ्लाइट से: आप गुवाहाटी के 'लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट' या फिर शिलांग के 'उमरोई एयरपोर्ट' के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। वहां से आपको आसानी से टैक्सी मिल जाएगी।
- ट्रेन से: जो लोग ट्रेन से सफर करना चाहते हैं, उनके लिए सबसे नजदीकी स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है।
- सड़क के रास्ते: मेघालय की राजधानी शिलांग से मौसिनराम सिर्फ 60-70 किलोमीटर दूर है। आप बस या टैक्सी बुक करके सड़क मार्ग से 2 से 2.5 घंटे के सुहावने सफर के बाद यहां पहुंच सकते हैं।