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    अरब सागर के बीचों-बीच खड़ा है 450 साल पुराना यह अजेय किला! जहां मुगल, मराठा और पुर्तगाली भी टेक गए घुटने

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 01:13 PM (IST)

    भारत का इतिहास किलों की कहानियों से भरा पड़ा है, पर क्या आप कल्पना कर सकते हैं ऐसे किले की जो समुद्र के बीचों-बीच हो? ...और पढ़ें

    समुद्र के बीचों-बीच स्थित मुरुड-जंजिरा किला (Image Source: AI Generated)

    समुद्र के बीचों-बीच स्थित मुरुड-जंजिरा किला (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत का इतिहास किलों की अनेकों कहानियों से भरा पड़ा है, पर क्या आप कल्पना कर सकते हैं एक ऐसे किले की जो समुद्र के बीचों-बीच मौजूद हो और जिसे जीतने की चाहत मुगलों से मराठों और फिर अंग्रेजों से पुर्तगालियों तक की हो? दरअसल, हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के तटीय गांव मुरुड में स्थित मुरुड-जंजिरा नामक पत्थर से बने 450 साल पुराने किले की। 

    समुद्र के बीचों-बीच स्थित मुरुड-जंजिरा

    मुरुड-जंजिरा अरब सागर के बीच बना विशाल किला है, यह महाराष्ट्र के रायगढ़ में मुरुड नामक जगह पर स्थित है। मुंबई से इसकी दूरी की बात करें तो वहां से यह किला करीब 165 किलोमीटर दूर मौजूद है। इस किले को अजेय कहा जाता है क्योंकि इतिहास में इस किले पर कई हमले हुए, पर कोई भी इसपर जीत हासिल न कर सका। 

    मुरुड-जंजिरा का इतिहास 

    15 वीं शताब्दी में स्थानीय मछुआरों ने समुद्री लुटेरों से बचने के लिए एक तरकीब निकाली, उन्होंने अरब सागर के बीच में लकड़ी का एक छोटा सा किला बना लिया। फिर साल 1567 में अहमदनगर सल्तनत के अबीसीनियाई वजीर मलिक अंबर ने इस लकड़ी के किले को पत्थर के विशाल किले में बदल । जानकारी के लिए आपको बता दें कि मलिक अंबर हमेशा से कोई वजीर नहीं थे, उन्हें इथियोपिया में बचपन में गुलाम बनाकर बेच दिया गया था और इस तरह वो भारत लाए गए। लेकिन उन्होंने यहां अपनी प्रतिभा के दम पर अहमदनगर सल्तनत में वजीर और रीजेंट का पदभार संभाला।

    किले पर हमलों के पीछे भी दिलचस्प इतिहास है, समुद्री मार्ग पर इसकी उपस्थिति होने के कारण मुगलों, मराठों, पुर्तगालियों और अंग्रेजों ने इसपर अपना कब्जा करने की खूब कोशिश की, पर अफसोस कोई भी सफल न हो पाया। बता दें कि 15 वीं शताब्दी में इस समुद्री रास्ते से सोने, रेशम, हाथी दांत और घोड़ों का व्यापार हुआ करता था। इसी वजह से भारत के पश्चिमी तट पर समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए इस किले की अहमियत बहुत ज्यादा थी। 

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    छत्रपति शिवाजी महाराज ने की थी जीतने की कोशिश

    मुरुड-जंजिरा किले पर जीत हासिल करने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने काफी कोशिशें की थीं लेकिन उनकी एक भी कोशिश सफल नहीं हो पाई। इसके पीछे की एक बड़ी वजह थी किले की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था। 

    कैसे पहुंचा जाए? 

    अगर आप महाराष्ट्र में घूमने का मन बना रहे हैं तो मुरुड-जंजिरा का किला एक यादगार लोकेशन बन सकता है। यहां पहुंचने के लिए टूरिस्ट राजापुरी जेट्टी से नाव ले सकते हैं। वहीं, घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का महीना सबसे अच्छा माना जाता है। 

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    Source: Maharashtra Tourism