सेंट एंजेल ब्रिज: रोम का वो ऐतिहासिक पुल जिसकी खूबसूरती देख आज भी दंग रह जाती है दुनिया
इटली की राजधानी रोम में टिबर नदी पर स्थित ऐतिहासिक सेंट एंजेल ब्रिज, सम्राट हैड्रियन द्वारा निर्मित एक अद्भुत वास्तुकला का नमूना है। ...और पढ़ें

रोमन इंजीनियरिंग का वो अजूबा, जिसके सामने आज की तकनीक भी फेल है! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इटली की राजधानी रोम सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन इतिहास और वास्तुकला के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। इसी शहर के बीचों-बीच बहने वाली टिबर नदी पर एक बेहद खास और ऐतिहासिक पुल बना है, जिसे पोंटे सेंट एंजेल ब्रिज या 'एंजेल ब्रिज' के नाम से जाना जाता है। यह सिर्फ नदी पार करने का एक रास्ता नहीं है, बल्कि रोम के इतिहास, धर्म और कला का एक शानदार नमूना है।

(Image Source: Castel Sant'Angelo)
सम्राट हैड्रियन की सोच और अद्भुत वास्तुकला
इस भव्य पुल का निर्माण सन् 134 ईस्वी में रोमन सम्राट हैड्रियन ने करवाया था। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य शहर के केंद्र को उनके द्वारा बनवाए गए एक आलीशान मकबरे से जोड़ना था। यही मकबरा आज 'सेंट एंजेल किले' के नाम से विश्व विख्यात है।
- मजबूत ढांचा: यह पुल 'ट्रैवर्टीन मार्बल' से बनाया गया है, जो इसे बेहद मजबूती और आकर्षण प्रदान करता है।
- प्राचीन मेहराब: रोमन इंजीनियरिंग की महानता को दर्शाते इस पुल में कुल 5 मेहराब हैं। इनमें से 3 मेहराब तो मूल रूप से प्राचीन रोमन काल के ही हैं।
नदी के किनारे से पुल तक आसानी से पहुंचने के लिए एक खास ढलान भी बनाई गई थी। इसकी संतुलित संरचना आज भी लोगों को हैरत में डाल देती है।

(Image Source: Castel Sant'Angelo)
कैसे पड़ा इसका नाम 'सेंट एंजेल'?
इस पुल और इससे जुड़े किले के नाम के पीछे छठवीं शताब्दी की एक बेहद दिलचस्प किंवदंती जुड़ी है। उस समय रोम में पोप ग्रेगोरी प्रथम का प्रभाव था।
ऐसा कहा जाता है कि रोम में फैली एक भयंकर महामारी के दौरान, किले की छत पर अचानक एक संत प्रकट हुए। उन्होंने इस महामारी के हमेशा के लिए खत्म होने की घोषणा की। इसी घटना के बाद किले और इस पुल, दोनों का नाम 'सेंट एंजेल' रख दिया गया।
खबरें और भी
यह पुल राजनीतिक और धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था। बाद में यह किला पोप के छिपने और सुरक्षित रहने का एक मुख्य आश्रय स्थल बन गया था। रोम के इतिहास में इस पुल से होकर कई बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं और धार्मिक जुलूस गुजरे हैं।
पुल की असली शान है देवदूतों की मूर्तियां
इस पुल की सुंदरता यहां लगी शानदार मूर्तियों से कई गुना बढ़ जाती है। 16वीं शताब्दी में, पोप ने पुल से मिलने वाले टोल टैक्स के धन का इस्तेमाल करके यहां धार्मिक मूर्तियां बनवाईं। सबसे पहले यहां संत पीटर और संत पॉल की मूर्तियां लगाई गईं। बाद में, बाइबिल के अन्य महत्वपूर्ण पात्रों जैसे आदम, नूह, अब्राहम और मूसा की मूर्तियां भी इसमें शामिल की गईं।
पुल का सबसे बड़ा आकर्षण यहां मौजूद 10 देवदूतों की मूर्तियां हैं। इनमें से हर एक देवदूत के हाथ में ईसा मसीह के कष्टों और पीड़ा से जुड़ा कोई न कोई प्रतीक मौजूद है, जो इस पुल को रोम की एक खास पहचान देता है।

(Image Source: Castel Sant'Angelo)
एक दर्दनाक इतिहास और आज का 'पर्यटक स्थल'
इटली के महान कवि डेंटे एलिगेरी ने भी अपनी एक प्रसिद्ध रचना में इस पुल का जिक्र किया है। सन् 1300 ईस्वी के दौरान यहां तीर्थयात्रियों की इतनी भारी भीड़ होती थी कि लोगों के आने और जाने के लिए पुल पर दो अलग-अलग रास्ते बनाने पड़े थे।
एक समय ऐसा भी आया जब अत्यधिक भीड़ के भारी दबाव के कारण पुल की रेलिंग अचानक टूट गई। इस हादसे में कई लोग नीचे टिबर नदी में गिरकर डूब गए। इस दुखद घटना के बाद प्रशासन ने पुल के आस-पास किए गए अतिक्रमण को हटा दिया, ताकि रास्ते को चौड़ा किया जा सके और भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना से बचा जा सके।
आज का सेंट एंजेल ब्रिज
आज के समय में यह ऐतिहासिक पुल रोम के दो प्रमुख क्षेत्रों- पोंटे (जिसका नाम इसी पुल के नाम पर रखा गया है) और बोर्गो (जो प्रशासनिक रूप से इससे जुड़ा है) को आपस में जोड़ता है।
वर्तमान में यह पुल केवल पैदल चलने वालों के लिए ही खुला है।
यहां से खड़े होकर सेंट एंजेल किले का जो बेहद खूबसूरत नजारा दिखता है, वह इसे पर्यटकों की पहली पसंद बना देता है।
यह भी पढ़ें- एक मजबूरी के कारण पहली बार जनता के लिए खोले गए थे बकिंघम पैलेस के दरवाजे, दिलचस्प है ये इनसाइड स्टोरी
यह भी पढ़ें- 2600 ईसा पूर्व कैसे बनी दुनिया की सबसे पुरानी पक्की सड़क? हैरान कर देगी मिस्र की इंजीनियरिंग
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।