पहाड़ों को बर्बाद कर रहा ओवरटूरिज्म: मशहूर जगहों की बजाय 'ऑफ-सीजन' ट्रैवल और नए डेस्टिनेशन का करें रुख
बढ़ते ट्रैवलिंग के चलन से ओवरटूरिज्म की समस्या बढ़ रही है, जिससे प्राकृतिक और स्थानीय जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इससे बचने के लिए ऑफ-सीजन या ...और पढ़ें

ओवरटूरिज्म से बचें: जानें इसके नुकसान और जिम्मेदार यात्रा के तरीके (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
ऑफ-सीजन में यात्रा कर भीड़ और ओवरटूरिज्म से बचें
छोटे समूह या अकेले यात्रा कर बेहतर अनुभव पाएं
अज्ञात और वैकल्पिक पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पहले जहां लोग कभी-कभार या छुट्टी के समय ही घूमने या ट्रैवलिंग का प्लान बनाते थे। वहीं, अब ट्रैवलिंग के आसान और सस्ते साधनों की वजह से लोग पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा देश-विदेश की यात्रा कर रहे हैं। घूमने-फिरने से एक्सपोजर तो मिलता है लेकिन यह ओवरटूरिज्म का भी कारण बन रहा है। ऐसा होने से क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं और कैसे हम इसका कारण बनने से बच सकते हैं, इस आर्टिकल में जानेंगे।
क्या कहते हैं आंकड़े
पिछले कुछ दशकों में सस्ती फ्लाइट्स और दुनियाभर में मिडिल क्लास के बढ़ते दायरे की वजह से सैलानियों की संख्या बढ़ती जा रही है। गोवा में साल 2019 में 80 हजार टूरिस्ट पहुंचे थे, वहीं केरल के सिर्फ अल्लेप्पी में 15 लाख से भी ज्यादा सैलानी पहुंचे। कुछ ऐसा ही हाल पहाड़ों का भी है।
ये पड़ता है प्रभाव
- नेचुरल इकोसिस्टम बर्बाद हो जाता है
- प्लास्टिक और अन्य तरह का कचरा काफी बढ़ जाता है
- पानी के संसाधन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होते हैं
- स्थानीय पेड़-पौधों पर प्रभाव पड़ता है
- वास्तविक अनुभव कर्मिशियल बन जाते हैं
- कम्युनिटीज अपनी पहचान खोने लगती है
- शहर का ट्रैफिक बेलगाम हो जाता है
- पब्लिक प्लेसेस पर काफी भीड़ हो जाती है
- स्थानीय लोगों के लिए चीजें महंगी हो जाती हैं
इन 4 तरीकों से इसका हिस्सा बनने से बच सकते हैं
- ऑफ सीजन में यात्रा: किसी मशूहर डेस्टिनेशन की यात्रा करना चाहते हैं और भीड़ का हिस्सा बनने से बचना चाहते हैं तो पीक सीजन में जाने की बजाय ऑफ सीजन में जाएं। इससे आप उस जगह को ज्यादा बेहतर तरीके से एक्सप्लोर कर पाएंगे और ओवरटूरिज्म का हिस्सा बनने से भी बच जाएंगे।
- अपनाएं अलग तरीका: उस शहर के नामचीन सेंटर्स पर ज्यादा वक्त बिताने की बजाय आस-पास के ग्रामीण या अनदेखे हिस्सों में ट्रैवल करें। ट्रैवलिंग के इस अनोखे तरीके से आपको उस फेमस जगह को देखने का अलग नजरिया और अनुभव मिलेगा।
- छोटा बेहतर है: बहुत बड़े ग्रुप या बड़े क्रू शिप में जाने से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। छोटे ग्रुप या सोलो ट्रैवल करने से आपको ज्यादा पर्सनल अनुभव मिलेगा और आप उस जगह को ज्यादा करीब से देख पाएंगे। आपको लोकल रेस्टोरेंट, कैफे और ठहरने का भी बेहतर अनुभव मिल पाएगा।
- अल्टरनेटिव जगहों पर जाएं: ऐसी जगहों पर जाने का प्लान बनाएं जो लोगों के बकेट लिस्ट कम आते हों और जहां की इकोनॉमी में बड़ा हिस्सा पर्यटन का हो। नेपाल, भूटान, श्रीलंका जैसे देश बेहतर ऑप्शन हो सकते हैं।
- लोकल को चुनें: यदि आप कोई टूर प्लान सिलेक्ट कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि उसमें ज्यादातर लोकल लोग ही हों। जो आपको उस क्षेत्र में ज्यादा सस्टेंबल तरीके से घूमने के तरीके बता सकें।
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