MP में नकली परमिट, अवैध शराब परिवहन के मामले में बड़ी कार्रवाई, सोम डिस्टलरी के दो लाइसेंस निलंबित
राज्य सरकार ने नकली परमिट के जरिए अवैध शराब परिवहन के मामले में सोम डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड सेहतगंज और रोजराजक के दो लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। महा ...और पढ़ें

अवैध शराब कारोबार पर कार्रवाई (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। नकली परमिट के जरिए अवैध शराब परिवहन के गंभीर मामले में राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सोम डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड सेहतगंज और रोजराजक (जिला रायसेन) को जारी अलग-अलग लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। महाधिवक्ता से विधिक परामर्श मिलने के बाद आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने चार फरवरी को निलंबन के आदेश जारी किए।
दरअसल, इस प्रकरण में उच्च न्यायालय इंदौर की खंडपीठ ने आरोपितों को दी गई सजा के क्रियान्वयन पर तो रोक लगाई है, लेकिन दोषसिद्धि के आदेश को खारिज नहीं किया गया है। साथ ही, लाइसेंस निलंबन पर भी किसी प्रकार की रोक नहीं है। आबकारी अधिनियम के तहत नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई का अधिकार आयुक्त को प्राप्त है, जिसका उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया गया।
2023 के मामले में हुई थी सजा
यह मामला वर्ष 2023 का है, जब नकली परमिट बनाकर अवैध शराब के परिवहन का खुलासा हुआ था। अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने सोम डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड सेहतगंज और रोजराजक को दोषी मानते हुए कंपनी प्रतिनिधि उमाशंकर शर्मा, जी.डी. अरोड़ा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर और दीनानाथ सिंह को विभिन्न धाराओं में कारावास व अर्थदंड से दंडित किया था।
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इसके खिलाफ कंपनी पदाधिकारियों ने उच्च न्यायालय इंदौर में याचिका दायर की, जहां सजा पर अस्थायी रोक लगाई गई। इसके बाद लाइसेंस निलंबन को लेकर आबकारी आयुक्त कार्यालय ने महाधिवक्ता से राय मांगी थी। परामर्श में स्पष्ट किया गया कि सजा पर रोक होने के बावजूद दोषसिद्धि आदेश प्रभावी है और निलंबन की कार्रवाई पर कोई कानूनी बाधा नहीं है।
विभागीय कार्रवाई भी जारी
उल्लेखनीय है कि इसी प्रकरण में 25 सितंबर 2025 को आबकारी उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। वहीं, विभाग के अन्य अधिकारी—मदन सिंह पंवार, कैलाश चंद्र बंगाली और राम प्रसाद मिश्रा—सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए प्रस्ताव आयुक्त कार्यालय द्वारा शासन को भेजे गए हैं।
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