MP में सुरक्षित हाईवे की ओर बड़ा कदम : एमपीआरडीसी ला रहा एआरएस 3.0, इमरजेंसी रिस्पॉन्स होगा फास्ट
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) अपने एक्सीडेंट रिस्पांस सिस्टम (ARS) को ARS 3.0 में अपग्रेड कर रहा है। यह नया संस्करण राज्य के स्टेट हाईवे पर सड़क ...और पढ़ें

सुरक्षित हाईवे की दिशा में नई पहल।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) राज्य के स्टेट हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में और तेज व प्रभावी सहायता पहुंचाने के लिए एक्सीडेंट रिस्पांस सिस्टम (एआरएस) को अपग्रेड करने जा रहा है। वर्ष 2014 में शुरू किए गए इस इंटीग्रेटेड सिस्टम का नया वर्जन एआरएस 3.0 तैयार किया जा रहा है, जो मौजूदा एआरएस 2.0 से कहीं अधिक आधुनिक और समन्वित होगा।
डायल 112, 108 और 100 से होगा सीधा एकीकरण
नए सिस्टम को डायल 112, 108, 100 जैसी आपातकालीन सेवाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि हादसे की सूचना मिलते ही घायलों तक तुरंत मदद पहुंच सके। इस अपग्रेडेशन पर एमपीआरडीसी करीब 9 करोड़ 25 लाख रुपये खर्च करेगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एआरएस के जरिए स्टेट हाईवे और प्रमुख जिला सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं का न केवल त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित किया जाता है, बल्कि पूरा डिजिटल डेटाबेस भी तैयार किया जाता है।
जीपीएस, सेंसर और कैमरों से मिलेगी हादसे की जानकारी
एआरएस का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनास्थल की सटीक पहचान करना है। हाईवे पर लगे कैमरों के साथ-साथ एंबुलेंस और पेट्रोलिंग वाहनों में लगे जीपीएस व सेंसर के माध्यम से हादसे की सूचना सिस्टम तक पहुंचती है। जानकारी मिलते ही केंद्रीकृत कॉल सेंटर से कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम के जरिए नजदीकी एंबुलेंस और पुलिस को अलर्ट किया जाता है, ताकि घायलों को प्राथमिक उपचार और त्वरित सहायता मिल सके।
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सात लाख से ज्यादा हादसों में मिली मदद
28 दिसंबर 2014 को शुरू किए गए एआरएस के जरिए अब तक 7 लाख से अधिक दुर्घटनाओं में सहायता पहुंचाई जा चुकी है। तीन फरवरी 2026 तक 7,01,000 से ज्यादा मामलों में सिस्टम सक्रिय रहा। वहीं, इस वर्ष एक जनवरी से तीन फरवरी के बीच 502 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं और कॉल सेंटर पर 4,117 फोन कॉल प्राप्त हुए।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में स्टेट हाईवे पर सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं, जहां 3 लाख 85 हजार हादसों की सूचना एआरएस सिस्टम में दर्ज की गई। एआरएस 3.0 के लागू होने से हादसों में राहत और बचाव कार्य और अधिक तेज व प्रभावी होने की उम्मीद है।
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