बिजली विभाग की लापरवाही से खेत हो गया था खाक, किसान को मिलेंगे 10 लाख रुपये; कंज्यूमर कोर्ट ने क्यों दिया ऐसा आदेश?
नागपुर उपभोक्ता आयोग ने बिजली विभाग को एक किसान को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। किसान की बांस की फसल पावर लाइन में खराबी के कारण जल गई थी। आयोग ने MSEDCL को लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी पाया। विभाग को मुआवजे के साथ मानसिक तनाव और कानूनी खर्च भी देने का आदेश दिया गया है।

पीटीआई, मुंबई। महाराष्ट्र के नागपुर में उपभोक्ता आयोग ने सरकारी बिजली कंपनी को एक किसान को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। किसान की बांस की फसल उसके खेतों के ऊपर से गुजर रही पावर लाइन में फॉल्ट की वजह से जल गई थी।
नागपुर के अतिरिक्त जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के तीन शीर्ष इंजीनियरों और एरिया के रिजनल डायरेक्टर को मुआवजा देने का निर्देश दिया।
5000 बांस के पेड़ जलकर खाक
दरअसल 68 वर्षीय किसान के खेतों के ऊपर से पावर लाइन गुजरती है। किसान का आरोप है कि उसने अपने खेतों में 5000 बांस के पेड़ लगाए थे, जो बेचे जाने के लिए पूरी तरह तैयार थे। लेकिन 22 मार्च 2018 को बिजली विभाग की हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन में स्पार्किंग हुई और चिंगारी उसके खेतों के ऊपर गिरने लगी।
किसान का आरोप था कि इस कारण उसकी पूरी फसल जलकर राख हो गई। किसान ने तहसीलदार और स्थानीय पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई और बिजली विभाग को भी जानकारी दी गई। खेत का पंचनामा कराया गया और पावर लाइन को रिपेयर किया गया।
उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
- वन विभाग ने अपने आंकलन में नुकसान को 10.27 लाख रुपये का बताया और इसे बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सौंप दिया गया। लेकिन किसान को मुआवजे के तौर पर केवल 4.2 लाख रुपये ही मिले, जिस कारण उसे उपभोक्ता आयोग जाना पड़ा। उसने मांग की कि वन विभाग द्वारा तय मुआवजे का भुगतान किया जाए।
- उपभोक्ता आयोग ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग को आदेश दिया कि वह 10.27 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दे और इसमें केस फाइल होने से अब तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज की दर भी जोड़े। इसके अलावा मानसिक तनाव के लिए 40 हजार और लीगल खर्चों के लिए 10 हजार रुपये भी दे।
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