साल 2005 में दी थी परीक्षा, 18 साल बाद मिला अप्वाइंटमेंट लेटर, लेकिन नहीं कर पाएंगे नौकरी
केरलम के मलप्पुरम जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दरअसल एक सख्स को केरल लोक सेवा आयोग की ओर से 18 साल बाद नियुक्ति-पत्र दिया गया है। जिसके बा ...और पढ़ें

यहां पढ़ें पूरी खबर।
HighLights
केरलम के इस सख्स को 18 साल बाद मिला नियुक्ति-पत्र।
साल 2005 में दी थी पीसीएस परीक्षा।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले किसी भी अभ्यर्थी के लिए अप्वाइंटमेंट लेटर एक ख्वाब की तरह होता है। लेकिन केरलम के मलप्पुरम जिले में रहने वाले अब्दुल मजीद के लिए सरकारी नौकरी का यह नियुक्ति-पत्र खुशी नहीं, बल्कि निराशा साथ लेकर आया है।
दरअसल अब्दुल मजीद ने साल 2005 में PCS की परीक्षा पास की थी। परीक्षा पास करने के बाद वह लगातार नियुक्ति-पत्र का इंतजार करते रहें। लेकिन तीन साल बाद 2008 में मेरिट लिस्ट खत्म होने के साथ-साथ नौकरी पाने की उनकी उम्मीदें भी पूरी तरह से खत्म हो गई।
हालांकि, उम्मीदवारों की कमी के कारण नौकरी को दोबारा बहाल किया गया और 18 साल बाद मजीद को नियुक्ति-पत्र दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिस पद के लिए उन्हें नियुक्त-पत्र दिया गया है। उस पद के लिए अब वह योग्य नहीं है, क्योंकि अब्दुल मजीद रिटायरमेंट की उम्र भी पार चुके हैं।
क्यों चर्चा में आया ये मामला
मलप्पुरम जिले के रहने वाले अब्दुल मजीद को 26 अप्रैल, 2026 को केरल लोक सेवा आयोग की ओर से जूनियर शिक्षक अरबी के पद पर नियुक्त करने के लिए एक एडवाइस मेमो मिला। हालांकि इस अप्वाइंटमेंट लेटर को देखकर मजीद खुश तो हुए। लेकिन उनकी रिटायरमेंट की उम्र निकल चुकी थी। बता दें, जब तक यह नियुक्ति-पत्र उनके पास पहुंचा, तब तक सरकारी दस्तावजों के अनुसार वह 60 साल की उम्र पार चुके थे।
खबरें और भी
18 साल का लंबा इंतजार
अब्दुल मजीद ने केरलम पीसीएस की परीक्षा साल 2005 में दी थी। परीक्षा पास करने के बाद मजीद नियुक्ति-पत्र का इंतजार करते रहे। लेकिन साल 2008 में भर्ती समाप्त कर दी गई और इस तरह मजीद का सपना भी टूट गया। लेकिन योग्य उम्मीदवार की कमी के कारण पद को खाली छोड़ दिया गया, जिसे भरने के लिए 18 सालों बाद मजीद को एडवाइस मेमो भेजा गया। मजीद का कहना है कि इस पद पर भर्ती साल 2010 में ही होनी थी। लेकिन यह नियुक्ति-पत्र उन्हें 18 साल बाद मिला है। मजीद ने कहा यह पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है।
सरकारी दस्तावेजों में गलत जन्मतिथि
अब्दुल मजीद का कहना है कि हाईस्कूल की मार्कशीट में उनकी जन्मतिथि 27 मई, 1966 दर्ज है। लेकिन उनकी वास्तविक जन्मतिथि 27 मई, 1967 है। मजीद ने शिक्षा मंत्री को एक आवेदन भी भेजा है। ताकि इस गड़बड़ी को समय रहते ठीक किया जा सके और वह अपनी एक साल की बची नौकरी का लाभ ले सकें। बता दें, मजीद का नाम बतौर अरबी टीचर के रूप में एक अन्य पीसीएस लिस्ट में भी शामिल था। लेकिन रिजर्व टीचर्स को प्राथमिकता देने के कारण वहां भी उन्हें निराशा ही मिली और एक बार फिर सरकारी टीचर बनने का उनका यह सपना बस सपना ही बनकर रह गया।