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    बेहतर कनेक्टिविटी के चलते सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में डिजिटल अंतर में सुधार, देखें रिपोर्ट

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 10:44 AM (IST)

    UDISE+ द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट की बेहतर कनेक्टिविटी के चलते सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में डिजिटल अंतर में तेजी से सुधार हो रहा है। ...और पढ़ें

    बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों में अंतर हो रहा कम।

    बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों में अंतर हो रहा कम।

    HighLights

    1. स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा में गोवा टॉप पर।

    2. पश्चिम बंगाल को हासिल हुआ अंतिम स्थान।

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में डिजिटल अंतर में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। पिछले तीन वर्षों में इसमें तेजी देखने को मिली है। पिछले 3 वर्षों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कवरेज 2023-24 में 46.2% से बढ़कर 2025-26 में 63.1% हो गया है। एडेड (सरकारी सहायता प्राप्त) स्कूलों व प्राइवेट स्कूलों पहले ये अंतर लगभग 28 प्रतिशत अंक था जो घटकर लगभग 16 प्रतिशत अंक रह गया है। इस सेशन में स्मार्ट क्लासरूम की हिस्सेदारी भी 21.2% से बढ़कर 32.2% हो गई है, हालांकि यह एडेड स्कूलों (41%) और अनएडेड स्कूलों (39.9%) से अभी भी कम है।

    रिपोर्ट के आंकड़े

    UDISE+ द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पहले 67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा थी। आंकड़ों में यह 2024-25 में 63.5% और 2023-24 में 53.9% थी।

    गोवा टॉप पर तो पश्चिम बंगाल सबसे नीचे

    रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में गोवा राज्य में सभी स्कूलों में यानी कि 100% स्कूलों में इंटरनेट कवरेज उपलब्ध है वहीं इस मामले में पश्चिम बंगाल राज्य सबसे पीछे है। यहां पर 2025-26 में केवल 19.7% स्कूलों में इंटरनेट कवरेज मौजूद है।
    केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर, गोवा के बाद आंध्र प्रदेश का नंबर आता है जहां कवरेज 99.2% है। इसके बाद तमिलनाडु 99%, गुजरात 96.8% और केरल 92.6% हैं। सबसे निचले स्तर पर बंगाल के बाद अरुणाचल प्रदेश 36%, मेघालय 36.4%, मणिपुर 38.8% और त्रिपुरा 42.5% हैं।

    गोवा और आंध्र प्रदेश में देखने को मिला जबरदस्त उछाल

    गोवा का कवरेज 2023-24 में 87.6% से बढ़कर पूरा 100% हो गया वहीं आंध्र प्रदेश का 93.9% से बढ़कर 99.2% हो गया। सबसे निचले 5 राज्यों में, मेघालय में लगभग 12 प्वाइंट और त्रिपुरा में सात से ज्यादा प्वाइंट की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। बंगाल में मामूली सुधार हुआ जहां कवरेज 17.5% से बढ़कर 19.7% हो गया। सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा 73.3% से बढ़कर 79.7% हो गई और प्राइवेट बिना सहायता वाले स्कूलों में यह 74.3% से बढ़कर 79.2% हो गई।

    कंप्यूटर की उपलब्धता में भी देखने को मिला सुधार

    कंप्यूटर की उपलब्धता में भी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में ज्यादा अंतर नहीं बचा है। 2025-26 में 69.9% स्कूलों में कंप्यूटर थे इसमें से सरकारी स्कूलों में 66.9%, सहायता प्राप्त स्कूलों में 76.6% और निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 80% उपलब्धता थी। हालांकि, पढ़ाई-लिखाई में इस्तेमाल के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 59.4%, 73.7% और 74% है।
    इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर स्मार्ट-क्लासरूम की सुविधा में भी सुधार देखने को मिल रहा है। 2023-24 के 24.4% से बढ़कर 2025-26 में 33.9% स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध हैं।
    हालांकि, इन सबके बीचे डिजिटल लाइब्रेरी की कमी बनी रही। देशभर में यह केवल 7.1% स्कूलों में उपलब्ध थीं जिसमें से 5.7% सरकारी, 10.4% सहायता प्राप्त और 11.2% निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि NEP (नई शिक्षा नीति) ऐसे स्कूलों की कल्पना करती है जो "कंप्यूटिंग डिवाइस, इंटरनेट, लाइब्रेरी" और अन्य बुनियादी सुविधाओं से लैस हों, ताकि "सीखने का एक सुरक्षित, समावेशी और प्रभावी माहौल" बनाया जा सके।

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