कितने पढ़े-लिखे हैं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर, रणनीतिकार से सक्रिय राजनीति का सफर किया पूरा
बिहार की बांकीपुर सीट पर विधानसभा उपचुनाव का रिजल्ट आ गया है। प्रशांत किशोर ने अपने प्रतिद्वंदी को हराकर जीत अर्जित कर ली है। रणनीतिकार से सक्रिय राजन ...और पढ़ें

Jan Suraaj founder Prashant Kishor Education
HighLights
पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री एवं सर्टिफिकेट होल्डर हैं प्रशांत किशोर।
डेब्यू चुनाव में ही पा ली विजय।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती पूरी हो गई है और इस सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर ली है। अभी तक रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले PK अपना पहला चुनाव लड़ रहे थे और पहली ही बार में वे जीत की दहलीज पर पहुंचने गए हैं। इसी को देखते हुए चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने किशोर पर सबकी नजरें टिक गई हैं क्योंकि उन्होंने एतिहासिक जीत प्राप्त कर ली है।
कई डिग्री, सर्टिफिकेट होल्डर हैं प्रशांत किशोर
देशभर में पीके के नाम से जाने-जाने वाले प्रशांत किशोर के पास कई डिग्री व सर्टिफकेट हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा बिहार से हुई। उन्होंने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के तहत एमपी हाई स्कूल, बक्सर से मैट्रिकुलेशन (कक्षा 10) वर्ष 1991 में पास किया वहीं इंटरमीडिएट (कक्षा 12) वर्ष 1993 में बिहार इंटरमीडिएट एजुकेशन काउंसिल के तहत पटना साइंस कॉलेज से पास किया।
इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी (1996–1999) से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की। एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI), हैदराबाद (2001–2003) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (MHA) पूरा किया। यह प्रोग्राम जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और हिंदुजा हॉस्पिटल के सहयोग से चलाया गया था। 2010 में फ्रांस की क्लेरमोंट-फेरैंड यूनिवर्सिटी से जुड़े CAVILAM विची में फ्रेंच भाषा का एक गहन प्रोग्राम भी पूरा किया।
इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट के तौर पर करियर किया स्टार्ट
2000 के दशक में उन्होंने एक इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट के तौर पर अपना करियर शुरू किया और UN के फंड से चलने वाले एक प्रोग्राम में लगभग आठ साल तक काम किया। अपने काम के सिलसिले में उन्हें मध्य अफ्रीका के चाड जैसे देशों में जाना पड़ा।
2010 में राजनीतिक रणनीतिकार बने
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर रिसर्च करते समय उन्होंने कुपोषण पर एक पेपर लिखा, जिसने 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने राजनीतिक रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और 'सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' (CAG) और बाद में 'I-PAC' (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) की सह-स्थापना की। उन्होंने पूरे भारत में नरेंद्र मोदी (BJP), नीतीश कुमार (JD-U), ममता बनर्जी (TMC) और एम.के. स्टालिन (DMK) जैसे प्रमुख नेताओं के लिए बेहद सफल चुनावी अभियानों का नेतृत्व किया। वर्ष 2021 में उन्होंने राजनीतिक रणनीतिकार से ब्रेक लेने की घोषणा कर दी।
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2024 में अपनी पार्टी का किया गठन
रणनीतिकार से ब्रेक लेने के बाद पीके ने अपने गृह राज्य बिहार से जमीनी स्तर की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया और 2 अक्टूबर 2024 को उन्होंने 'जन सुराज' पार्टी का गठन किया। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सके। अब वे उपचुनाव में मैदान में उतरे और जीत की ओर बढ़ रहे हैं।