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    Independence Day 2025: वो शिक्षक जिन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए युवाओं को शिक्षित किया

    Updated: Fri, 15 Aug 2025 05:35 PM (IST)

    ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के लिए भारत ने सालों तक संघर्ष किया है। भारत को आजादी दिलाने के लिए महज बड़े नेता ही नहीं बल्कि शिक्षकों और विद्वानों ने भी अपने विचारों लेखन और राष्ट्रीय गीत से युवाओं में आदाजी की लहर पैदा की। ऐसे ही पांच शिक्षकों और विद्वानों के बारे में यहां विस्तार से बताया गया है।

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    Independence Day 2025: यहां पढ़ें उन शिक्षक व विद्वानों के बारे में।

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली: जब भी स्वतंत्रता की बात आती है, हमारे जहन में सबसे पहले महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान लोगों के नाम याद आते हैं। भारत को आजादी दिलाले में इन्होंने विशेष योगदान दिया है। लेकिन स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐसे शिक्षकों व विद्वानों के योगदान को भी याद किया जाना चाहिए, जिन्होंने न सिर्फ भारत को आजादी दिलाने के लिए संघर्ष किया बल्कि, अपने विचारों, लेखन और सुधार से कई लोगों को आजादी के महत्व से भी अवगत कराया। आज भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे में स्वंतत्रता दिवस के अवसर पर उन शिक्षकों व विद्वानों के महत्व के बारे में बात की जाएगी, जिन्होंने भारतीय युवाओं में आजादी की लहर को विकसित किया और अपने विचारों से लोगों को आजादी के प्रति प्रेरित किया।  

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    सावित्रीबाई फुले

    सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा पर विशेषतौर पर जोर दिया। उन्हें भारत की समाज सुधारक, कवयित्री के रूप में जाना जाता है। वह भारत की पहली महिला शिक्षक के रूप में भी जानी जाती हैं। उन्होंने महिलाओं व दलितों के लिए कई स्कूल भी खोले, जिसके कारण उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ा। लेकिन सावित्रीबाई फुले का केवल एक ही लक्ष्य था, सभी लोगों को शिक्षित करना। उनका मानना था कि अगर लोग शिक्षित होंगे तो वे अपने अधिकारों को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

    ज्योतिबा फुले

    आजादी के इस अवसर पर ज्योतिबा फुले के योगदान को भी याद किया जाना चाहिए। लोगों को शिक्षित करने के लिए ज्योतिबा फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर साल 1848 में पहला कन्या विद्यालय खोला, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था। ज्योतिबा फुले को एक मानवतावादी, लेखक, दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने जातिवाद जैसे मुद्दों को खत्म करने के लिए अपने विचार रखें।

    बाल गंगाधर तिलक

    बाल गंगाधर तिलक एक विद्वान, लेखक, गणितज्ञ और दार्शनिक थे। उन्होंने भारत में लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। साथ ही उन्होंने अपने भाषण व विचारों से हमेशा लोगों को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने ब्राह्मणवादी रूढ़िवादिता का विरोध किया। साथ ही दलितों और महिलाओं के अधिकारों के प्रति सामाजिक न्याय आंदोलनों की शुरुआत की।

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    रवीन्द्रनाथ ठाकुर एक महान कवि, साहित्यकार और दार्शनिक के रूप में जाने जाते है। इन्होंने अपने लेखन व राष्ट्रगीतों से भारतीय लोगों में आजादी की लहर विकसित करने में मदद की। इन्होंने युवाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शांति निकेतन विद्यालय की स्थापना भी की।

    डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

    डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को एक महान शिक्षक और दार्शनिक के रूप में जाना जाता है। इन्होंने भारत के युवाओं को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही इन्होंने भारतीय संस्कृति का प्रचार किया और शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आजादी की लड़ाई में योगदान देने के लिए अतुलनीय भूमिका निभाई।

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