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    पीएम मोदी के गले में देख फिर चर्चा में आया असमिया गमछा, क्या आप जानते हैं अहोम राजाओं से जुड़ी इसकी ये परंपरा?

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 09:06 AM (IST)

    असम के पारंपरिक गमछे को किसी विशेष व शुभ अवसर पर पहनने की परंपरा है। इसलिए आज पीएम नरेंद्र मोदी ने असमिया गमछे के साथ छात्रों का (Pariksha Pe Charcha ...और पढ़ें

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    Pariksha Pe Charcha 2026: गमछे का महत्व।

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी 06 फरवरी को 'परीक्षा पे चर्चा' के 9वां संस्करण की शुरुआत की। इस प्रोग्राम के जरिये पीएम नरेंद्र मोदी ने देशभर से आए बच्चों को परीक्षा के लिए बेहतर रणनीति अपनाने के लिए उनका मार्गदर्शन किया। साथ ही उन्होंने छात्रों को जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

    कार्यक्रम में शामिल होने वाले छात्रों के लिए यह एक बेहतरीन अनुभव था। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में जिस चीज ने दर्शकों एवं बच्चों का ध्यान सबसे ज्यादा आकर्षित किया था वह है असमिया गमछा।

    दरअसल आज पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने दिल्ली स्थित पीएम आवास पर देशभर से आए बच्चों से न केवल मुलाकात की, बल्कि असमिया अंदाज में उनका स्वागत भी किया। ऐसे में 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के बाद हर तरफ असम के इस गमछे की चर्चा में हो रही है। इसलिए आज इस लेख के माध्यम से हम आपको असमिया गमछे का इतिहास बताएंगे। साथ ही आपको इससे भी रूबरू करवाएंगे कि आखिर विशेष अवसरों पर असम के इस गमछे को पहनने का रिवाज कब और कहां से शुरू हुआ।


    असमिया अंदाज में छात्रों का स्वागत

    आज पीएम नरेंद्र मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा' के 9वें सीजन का शुभारंभ असमिया अंदाज में किया। दरअसल पीएम ने कार्यक्रम की शुरुआत में देशभर से आए बच्चों का स्वागत असम के पारंपरिक गमछा पहनाकर किया और फिर बच्चों के तमाम सवालों का जवाब भी दिया। बता दें, बच्चों को पहनाया गया यह गमछा कोई मामूली गमछा नहीं, बल्कि यह असम राज्य की परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।

    शुभ अवसर पर असमिया गमछा पहनने का रिवाज

    असम के इस गमछे को शुभ अवसर पर पहना एवं पहनाया जाता है। यह गमछा असम राज्य की पहचान, संस्कृति एवं परंपरा को दर्शाता है। जब भी असम में कोई तीज-त्योहार या शुभ अवसर होता है। तब वहां के स्थानीय लोग इस गमछे को बड़े ही शान के साथ पहनना पसंद करते हैं। असम के इस गमछे को असमी राष्ट्रवाद प्रतीक के रूप में भी मान्यता मिली हुई है।

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    क्या है असमिया गमछा

    सफेद रंग का असमिया गमछा असम की संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। असमी गमछा सूती कपड़े से बना होता है और इसका आकार आयताकार होता है। यह गमछा सफेद रंग का होता है, जिसमें तीन तरफ लाल रंग के किनारे बने होते हैं और चौथी तरफ से यह खुला हुआ होता है। असम में पारंपरिक रूप से दो प्रकार के गमछे होते हैं। पहला उका और दूसरा फूलम।

    उका सामान्यतः सफेद रंग का सादा टुकड़ा होता है, जिसका उपयोग गर्मियों के दिनों में किया जाता है। जबकि फूलम का उपयोग विशेष अवसरों जैसे बिहू त्योहार में किया जाता है। फूलम गमछे को विशेष अवसरों पर भेंट स्वरूप भी दिया जाता है।

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    कब मिली गमछे को राजनीतिक मान्यता

    असमी गमछे को असमी राष्ट्रवाद प्रतीक के रूप में साल 1916 में तब पहचान मिली जब 'असोम छात्र संमिलन' और 'असमिया साहित्य सभा' का गठन किया गया। इन संगठनों के गठन के बाद फूलम गमछे को एक सांस्कृति पहचान मिली और देखते ही देखते यह असम की संस्कृति बन गई। इसके बाद साल 1979 से लेकर साल 1985 तक यह गमछा असम आंदोलन में खूब प्रयोग किया गया।

    साल 2019 में भी नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दौरान यह गमछा एक बार फिर सुर्खियों में आया और यह गमछा एक बार फिर राजनीति एकता एवं विरोध का प्रतीक बन गया।

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