एंटी-रैगिंग नियमों की अनदेखी पर केंद्र सरकार की सख्ती, देश के 107 बड़े शिक्षण संस्थानों को थमाया नोटिस
शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि 2025 में 107 उच्च शिक्षण संस्थानों ने रैगिंग रोकने के नियमों का उल्लंघन किया, जिनमें 18 मेडिकल कॉलेज भी शामिल ह ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
107 उच्च शिक्षण संस्थानों ने रैगिंग नियमों का उल्लंघन किया।
यूजीसी ने 2025 में कारण बताओ नोटिस जारी किए।
शपथपत्र न लेना और रिपोर्ट न जमा करना मुख्य कारण।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए बनाए गए कड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इस बात की जानकारी सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन न करने पर देश के 107 उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन लापरवाह संस्थानों में 18 बड़े मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।
क्यों हुई कार्रवाई और क्या थीं कमियां?
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में जानकारी दी कि इन संस्थानों ने रैगिंग रोकने से जुड़े सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया था। जांच में मुख्य तौर पर दो बड़ी कमियां पाई गईं।
सुकांत मजूमदार ने पहली कमी के तौर पर शपथपत्र की अनदेखी पर जोर दिया। मजूमदार ने बताया कि इन संस्थानों ने अपने यहां पढ़ने वाले नए छात्रों और उनके माता-पिता या अभिभावकों से अनिवार्य रूप से 'एंटी-रैगिंग शपथपत्र' नहीं भरवाए थे।
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इसके अलावा रिपोर्ट जमा न करना भी एक बड़ा कारण बना। मंत्री ने बताया कि संस्थानों ने यूजीसी द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट भी जमा नहीं की थी।
रैगिंग के खिलाफ सख्त है सरकार
इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी का साफ निर्देश है कि देश के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। इसके तहत हर संस्थान के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे प्रवेश के समय ही छात्रों से एंटी-रैगिंग शपथपत्र लें और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखें।