भरत तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने पूछे 2 सवाल, याचिकाकर्ता का जवाब सुनते ही SC ने सुनवाई से ही कर दिया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर में भारत भूषण तिवारी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। ...और पढ़ें

भरत तिवारी एनकाउंटर।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
याचिकाकर्ता को पहले पटना हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया।
बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बिहार के भोजपुर में भारत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने की छूट दी है। जनहित याचिका में मुठभेड़ की जांच सीबीआई से कराने और जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई थी।
मंगलवार को जनहित याचिका न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगी थी। जैसे ही याचिकाकर्ता वकील विशाल तिवारी ने मामले को गंभीर बताते हुए बहस करनी चाही, कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
पहला सवाल
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पहला सवाल किया कि वह हाई कोर्ट क्यों नहीं गया सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आया है। हाई कोर्ट मामले की सुनवाई के लिए ज्यादा बेहतर है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है और ये मामला गंभीर है इसलिए शीर्ष अदालत को इस पर सुनवाई करनी चाहिए।
दूसरा सवाल
कोर्ट ने दूसरा सवाल किया कि याचिकाकर्ता कौन है?
जब याचिकाकर्ता ने कहा कि यह जनहित याचिका है तो कोर्ट ने साफ मना करते हुए कहा कि वह इस पर सुनवाई नहीं करेगा और कहा कि याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट है।
भरत तिवारी एनकाउंटर में CBI जांच की मांग
दाखिल याचिका में भारत भूषण को फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने का आरोप लगाते हुए मांग की गई थी कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। संबंधित पुलिस दल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई थी।
याचिका के मुताबिक, 17 जून को बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ में भारत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। इसमें उसके पिता के बयान का हवाला देते हुए दावा किया गया कि हथियार डालने के बाद भी पुलिस ने उसे गोली मार दी। हालांकि कोर्ट ने याचिका के गुणदोष पर कोई भी टिप्पणी किए बगैर मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया।
खबरें और भी
बता दें कि बिहार सरकार ने शनिवार को इस घटना की न्यायिक जांच की घोषणा की थी।
यह भी पढ़ें- भरत तिवारी एनकाउंटर: 8000 लोग; 300 पुलिस कर्मी और नेताओं का रेला, बिलौटी में ब्रह्मभोज की तस्वीरें