भारत की अगुआई वाले ब्रिक्स ने जी-7 को पीछे छोड़ा, US के इस दिग्गज अर्थशास्त्री ने डोनाल्ड ट्रंप को चेताया
भारत की अगुआई वाले ब्रिक्स ने वैश्विक उत्पादन में जी-7 को पीछे छोड़ दिया है। ब्रिक्स देशों की वैश्विक उत्पादन में 35% की हिस्सेदारी है जबकि जी-7 का योगदान 28% है। अर्थशास्त्री रिचर्ड वूल्फ ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है और भारत का रूस से तेल खरीदना दिखाता है कि शक्ति ब्रिक्स की ओर झुक रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की अगुआई वाले ब्रिक्स ने वैश्विक उत्पादन के मोर्चे पर अमेरिका के प्रभुत्व वाले संगठन जी-7 को पीछे छोड़ दिया है। ब्रिक्स देशों की वैश्विक उत्पादन में हिस्सदारी 35 प्रतिशत हो गई है। वहीं, जी 7 का वैश्विक उत्पादन में योगदान 28 प्रतिशत है।
अमेरिका के जाने-माने अर्थशास्त्री रिचर्ड वूल्फ ने चेताया है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है और अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत का रूस से तेल खरीदारी जारी रखना यह दिखाता है कि शक्ति का संतुलन अब अमेरिका से हट कर ब्रिक्स देशों की ओर झुक रहा है। अमेरिका की टैरिफ नीति ब्रिक्स को मजबूत और एकजुट बना रही है।
अमेरिका पर बढ़ा कर्ज का बोझ
वूल्फ ने एक पॉडकास्ट में कहा कि चीन ने यूएस ट्रेजरी बॉन्ड में हिस्सेदारी घटा दी है क्योंकि अमेरिका का कुल कर्ज 36 लाख करोड़ डॉलर हो गया है। कर्ज का बोझ डॉलर के लिए गंभीर चुनौतियां पेश कर सकता है। अगर कर्ज बढ़ने का ट्रेंड जारी रहता है तो अमेरिका के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा या उसे घरेलू खर्च में कटौती करनी पड़ेगी। इससे अमेरिका की ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थिति कमजोर होगी।
ब्रिक्स को मजबूत बना रहे हैं ट्रंप
अमेरिकी अर्थशास्त्री ने भारत के खिलाफ अमेरिकी टैरिफ को अप्रभावी रणनीति बताया है, जो भारत और दूसरे ब्रिक्स देशों को और करीब ला रही है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियां ब्रिक्स को और बड़ा, ज्यादा एकजुट और पश्चिम की तुलना में सफल आर्थिक विकल्प बना रही हैं।
ट्रंप ने ब्राजील और भारत पर लगाया है सबसे ज्यादा टैरिफ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों ब्राजील और भारत पर सबसे अधिक टैरिफ लगाएं हैं। दोनों देशों ने टैरिफ को अनुचित बताया है। चीन भी ट्रंप द्वारा अपनी बात मनवाने के लिए व्यापार को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का विरोध कर रहा है। उधर रूस भी अमेरिका और पश्चिमी देशों की दूसरे देशों पर दबाव बनाने की नीतियों की आलोचना कर चुका है। यह चारो देश ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य हैं। ट्रंप की नीतियों से वैश्विक परिदृश्य अनिश्चित हो गया है, ऐसे में ब्रिक्स देश आपसी सहयोग और मजबूत कर सकते हैं।
2026 में भारत करेगा ब्रिक्स की अगुवाई
ब्रिक्स अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का वैश्विक संगठन है, ब्राजील, रूस, भारत और चीन इसके संस्थापक सदस्य हैं। 2011 में दक्षिण अफ्रीका को इसका सदस्य बनाया गया और इसका नाम ब्रिक्स हो गया। आगे चल कर मिस्र, इथोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। अब ब्रिक्स के सदस्य देशों की संख्या 10 है। 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत करेगा।
- 49.5% वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं ब्रिक्स देश
- 40.0% योगदान है ग्लोबल जीडीपी में ब्रिक्स देशों का
- 38.0% हो गई वैश्विक उत्पादन में ब्रिक्स की हिस्सेदारी
विकसित देशों का समूह है जी- 7
जी- 7 विश्व के सात औद्योगिक रूप से सबसे अधिक विकसित देशों का समूह है। समूह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और मौद्रिक मुद्दों के समाधान के लिए काम करता है। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और कनाडा इसके सदस्य हैं। बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश के तौर पर भारत को भी जी- 7 की बैठकों में बुलाया जाता है।
- 28.5% रहने अनुमान है जी -7 की ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी
- 50.0% थी 1980 में जी-7 देशों की ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी
- 9.6% हिस्सा ही रहता है जी- 7 देशों में कुल वैश्विक आबादी का
(सोर्स- जागरण रिसर्च)
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