खाड़ी देशों में 12वीं बोर्ड के छात्रों की रद परीक्षा के लिए CBSE ने बनाई नई शिक्षा नीति, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों के उन प्राइवेट छात्रों के लिए नई मूल्यांकन नीति बनाई है, जिनकी 12वीं की बोर्ड परीक्षा ...और पढ़ें
-1782138183627_m.webp)
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई खाड़ी देशों के लिए CBSE बोर्ड की नई शिक्षा नीति
HighLights
खाड़ी देशों के प्राइवेट छात्रों के लिए सीबीएसई की नई नीति।
12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुए थे छात्र।
10वीं और पिछली 12वीं के अंकों पर आधारित मूल्यांकन।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने खाड़ी देशों के उन प्राइवेट छात्रों के मूल्यांकन के लिए नई नीति बनाई है, जो हालिया ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद होने से प्रभावित हुए थे।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ को केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 21 जून को जारी नई नीति के तहत जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनके लिए प्राइवेट अभ्यर्थी के प्रदर्शन का आकलन 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में थ्योरी में मिले अंकों का 40 प्रतिशत और 12वीं की पिछली बोर्ड परीक्षा में थ्योरी में मिले अंकों का 60 प्रतिशत जोड़कर किया जाएगा।
मेहता ने बताया कि सात खाड़ी देशों में परीक्षा रद होने से मुख्य रूप से स्कूलों के नियमित छात्र और प्राइवेट अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
प्राइवेट अभ्यर्थियों के मामले में एक चुनौती यह थी कि उनका कोई स्कूल नहीं था जो आंतरिक मूल्यांकन रिकार्ड (जैसे तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षा के अंक) दे सके। इन्हीं के आधार पर 27 मार्च की मूल मूल्यांकन योजना तैयार की गई थी।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
सुप्रीम कोर्ट सऊदी अरब के अल जुबैल के प्राइवेट अभ्यर्थी प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उसने सीबीएसई की मूल मूल्यांकन योजना के अनुसार अपनी 12वीं के इम्प्रूवमेंट एक्जामिनेशन के परिणाम घोषित नहीं किए जाने को चुनौती दी थी।
खबरें और भी
उसका कहना था कि सीबीएसई की 27 मार्च की मूल्यांकन योजना में नियमित छात्र तो शामिल थे, लेकिन इम्प्रूवमेंट एक्जामिनेशन देने वाले प्राइवेट अभ्यर्थियों के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं था। इस कारण उसका परिणाम रोक दिया गया था। इससे उसकी उच्च शिक्षा की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ा।
पटेल ने दावा किया कि जिन दो पेपरों (भौतिकी व रसायन विज्ञान) में वह शामिल हुआ था, उनका मूल्यांकन वास्तविक अंकों के आधार पर किया गया, जबकि रद तीन विषयों (गणित, अंग्रेजी व कंप्यूटर साइंस) में मूल्यांकन नए फार्मूले के तहत किया गया।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- 'कोलेजियम की कार्यवाही को लेकर नहीं खोलना चाहते हैं नए विवाद का पिटारा', हाई कोर्ट जज की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट