ब्रिक्स NSA बैठक में ईरान-चीन की अहम मुलाकात, रणनीतिक गठबंधन मजबूत करने पर जोर
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद, नई दिल्ली में ब्रिक्स सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में चीन-ईरान का रणनीतिक गठबंधन मजबूत हुआ। ...और पढ़ें


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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की समाप्ति के लिए स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद ईरान सरकार की कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नई दिल्ली में सोमवार को ब्रिक्स सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान देखने को मिला।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेट्री डॉ. गादिर नेजामीपुर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अहम मुलाकात हुई। इस बैठक में चीन ने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुलकर समर्थन किया। दोनों देशों के बीच इस मुलाकात को सामरिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।
ब्रिक्स बैठक में चीन-ईरान के बीच रणनीतिक मुलाकात
साथ ही भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने इसी बैठक के इतर डॉ. गादिर नेजामीपुर से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही ब्रिक्स प्लेटफार्म के तहत सहयोग बढ़ाने एवं भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।
ईरानी दूतावास की तरफ से बताया गया है कि डॉ. नेजामीपुर ने हाल के युद्ध में चीन सरकार द्वारा दिए गए राजनीतिक समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रामकता के विरुद्ध ईरान की जीत उसके राष्ट्र की अटूट इच्छाशक्ति, बुद्धिमान नेतृत्व और सशस्त्र बलों की क्षमता का परिणाम है।
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उन्होंने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। चीनी विदेश मंत्री ने ईरानी जनता की सराहना की और कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ ईरान के सुधरते संबंधों का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति-स्थिरता के लिए बातचीत एवं कूटनीतिक प्रयासों में चीन के रचनात्मक भूमिका निभाने की इच्छा जताई।
भारत के एनएसए ने ईरानी उप सचिव से की मुलाकात
चीन-ईरान संबंधों का बढ़ता महत्व व यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि चीन-ईरान का रणनीतिक गठबंधन अब सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा व भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला हो गया है। चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और दोनों देशों के बीच 'व्यापक सामरिक साझेदारी' पहले से ही मजबूत है।
इस समर्थन से ईरान को पश्चिमी दबाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगी, वहीं चीन मध्य पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाने और 'बेल्ट एंड रोड' पहल को आगे बढ़ाने में सफल होगा। दोनों पक्षों ने निकट परामर्श जारी रखने एवं सामरिक साझेदारी को और विस्तार देने पर सहमति जताई है।
उल्लेखनीय बात यह रही कि ईरान सरकार ने डॉ. नेजामीपुर और वांग यी के बीच हुई मुलाकात पर विस्तृत बयान जारी किया है, जबकि भारतीय एनएसए से हुई मुलाकात पर अलग से कोई सूचना नहीं दी गई है। इस बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय ने इंटरनेट मीडिया पर दो पंक्तियों का ट्वीट किया जिसे ईरानी दूतावास ने भी अपने आधिकारिक इंटरनेट मीडिया हैंडल से पोस्ट किया है।