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    ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन बना रहा सबसे बड़ा बांध, भारत पर क्या होगा इसका असर? ड्रैगन को पहले ही जारी हो चुका है डीमार्शे

    Updated: Sun, 20 Jul 2025 10:02 PM (IST)

    चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना का निर्माण शुरू कर दिया है जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है। 167.8 अरब डॉलर की यह परियोजना यारलुंग जांग्बो नदी पर बन रही है। भारत ने पहले भी इस परियोजना को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं क्योंकि इससे ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के प्रवाह पर असर पड़ने की आशंका है।

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    ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन बना रहा सबसे बड़ा बांध। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले पांच वर्षों से चीन सरकार की तरफ से रह-रह कर इस तैयारी की जानकारी दी जा रही थी कि वह ब्रह्मपुत्र नदी के मूल उद्यम स्त्रोत यार्लंग जांगबो के पास दुनिया की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना लगाएगी।

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    भारत आधिकारिक तौर पर इस परियोजना को लेकर अपनी चिंताएं भी चीन के समक्ष कई बार उठा चुका है। लेकिन अब चीन ने इस परियोजना के लिए निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है।

    चीन ने शुरू किया बांध बनाने का काम

    शनिवार को चीन के दक्षिणीपश्चिमी क्षेत्र में स्थित शहर नाइनगशी में पीएम ली शियांग ने 167.8 अरब डॉलर की इस परियोजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। चीन सरकार की तरफ से बताया गया है कि इस कार्यक्रम में निर्माण कार्य के लिए गठित विशेष सलाहकार समिति के सदस्यों के अलावा स्थानीय नागरिकों ने भी हिस्सा लिया है।

    अभी भारत ने जारी किया कोई आधिकारिक बयान

    भारत ने अभी तक इस परियोजना की शुरुआत पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पूर्व में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने और स्वंय विदेश मंत्री ने संसद को ब्रह्मपुत्र नदी के स्त्रोत स्थल के पास विशालकाय बिजली परियोजना के लिए बांध निर्माण कार्य पर अपनी चिंताएं प्रकट की हैं।

    इस बात की जताई जा रही चिंता

    कई विशेषज्ञों ने पूर्व में इस बात पर चिंता जताई है कि चीन की तरफ से निर्मित यह बांध परियोजना भारत व बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी व जमुना नदी में पानी के प्रवाह को काफी प्रभावित कर सकता है। यार्लंग जांगबो तिब्बत से निकलती है जो अरूणाचल प्रदेश के रास्ते भारत में प्रवेश करती है।

    अरूणाचल प्रदेश में इसे सियांग व दियांग नदी असम में ब्रह्मपुत्र नदी में बदल जाती है। बीच में कुछ और जल स्त्रोत इसमें मिल कर इसे विशाल रूप दे देते हैं। यह बांग्लादेश में जमुना नदी के नाम से जानी जाती है। चीन सरकार ने जिस बांध का निर्माण कार्य शुरू किया है उससे कितनी बिजली पैदा होगी, यह तो नहीं बताया गया है, लेकिन पूर्व में वहां की सरकारी मीडिया में इस बात की जानकारी दी गई है कि इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता एक लाख मेगावाट हो सकती है।

    'भारत के हितों पर ना पड़े कोई असर'

    इस परियोजना के लिए बहुत बड़े भू-भाग को खाली कराने का काम चीन ने पांच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया था। विदेश मंत्रालय की तरफ से जनवरी, 2025 में इस परियोजना के बारे में कहा गया था कि, चीन से यह कहा गया है कि वह भारत में आने वाली नदियों के अपस्ट्रीम क्षेत्र में किसी भी गतिविधि को लेकर इस बात का ख्याल रखे कि भारत के हितों पर कोई असर नहीं हो।

    इस पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसकी गतिविधियों से नीचे क्षेत्र के हिस्सों (भारत या बांग्लादेश) पर कोई विपरीत असर नहीं होगा। इसके बाद फरवरी, 2025 में इस संबंध में पूछे गये एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति व‌र्द्धन सिंह ने कहा था कि सरकार चीन की तरफ से पनबिजली परियोजना बनाने पर नजर रखे हुए है और अपने हितों को देखते हुए आवश्यक कदम उठा रही है ताकि डाउनस्ट्रीम (नदी के नीचले बहाव वाले क्षेत्र) में लोगों के जीवन व जीवकोपार्जन को सुरक्षित किया जा सकते। दोनों देशों के बीच साझा नदियों की स्थिति को लेकर चीन के साथ वर्ष 2006 में गठित विशेष व्यवस्था के तहत व कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई है।

    भारत की ओर से चीन को जारी किया गया था डीमार्शे

    चीन की तरफ से विशाल बांध परियोजना बनाने की घोषणा के बाद 30 दिसबंर, 2024 को विदेश मंत्रालय ने अपनी चिंताओं को लेकर को लेकर अपनी चिंताएं भी जताई और चीन को कूटनीतिक स्तर पर नोटिस (डीमार्शे) भी जारी किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया है।

    इस संदर्भ में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने दो जून, 2025 को एक महत्वपूर्ण बयान सोशल मीडिया के जरिए दिया था। उन्होंने कहा था कि ब्रह्मपुत्र नदी भारत में विस्तारित होती है, छोटी नहीं होती। ब्रह्मपुत्र के जलप्रवाह में चीन का हिस्सा सिर्फ 30-35 फीसद ही होता है। शेष जल का जल स्त्रोत भारत में ही होता है। भारत ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्भर नहीं रहता।

    यह भी पढ़ें: तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन ने शुरू किया दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण, क्या भारत के लिए बनेगा मुसीबत?