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    'चीन के डैम से हमें घबराने की कोई जरूरत नहीं, लेकिन...', ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे सबसे बड़े बांध को लेकर बोले सीएम हेमंत सरमा

    Updated: Mon, 21 Jul 2025 03:51 PM (IST)

    चीन द्वारा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़े बांध के निर्माण पर असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्हें तत्काल चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र को अधिकांश पानी भूटान और अरुणाचल प्रदेश से मिलता है। सरमा ने बांध के दो वैज्ञानिक पहलुओं पर बात की - एक पानी कम होने से जैव विविधता प्रभावित होगी और दूसरा यह बाढ़ को कम कर सकता है।

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    ब्रह्मपुत्र पर चीनी बांध असम सीएम ने बताई चिंताएं और प्रभाव। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी में दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध होगा। चीन इस डैम को बनाने के लिए 167.8 बिलियन डॉलर खर्च करेगा।

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    इस बीच असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा ने चीन की इस परियोजना को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। सीएम सरमा ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र पर बनाए जा रहे विशाल बांध - 167.8 बिलियन डॉलर की परियोजना - के दो वैज्ञानिक पहलू हैं, जिनमें से एक यह है कि इससे पूर्वोत्तर राज्य को हर साल प्रभावित करने वाली बाढ़ की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है।

    जानिए क्या बोले असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्हें असम के लोगों के लिए चिंता का कोई तत्काल कारण नहीं दिखता, क्योंकि नदी को मुख्य रूप से भूटान और अरुणाचल प्रदेश की सहायक नदियों से पानी मिलता है।

    आगे उन्होंने कहा कि बांध का प्रभाव उसके बनने के बाद ही पता चलेगा और उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मामले में अपने चीनी समकक्ष के संपर्क में है।

    इन दो पहलुओं के बारे में की सीएम ने बात

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मुझे तुरंत चिंता नहीं है क्योंकि ब्रह्मपुत्र एक विशाल नदी है और यह पानी के किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं है। ब्रह्मपुत्र को अपना ज्यादातर पानी भूटान और अरुणाचल प्रदेश से मिलता है, और बारिश का पानी व अन्य प्रकार का पानी हमारे राज्य से ही आता है।

    इसके अलावा दो अलग-अलग पहलुओं पर बात करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पहला - अगर चीन नदी के प्रवाह में बाधा डालता है, तो पानी कम हो सकता है और जैव विविधता प्रभावित होगी। लेकिन एक विपरीत दृष्टिकोण भी है - अगर पानी कम आएगा, तो यह 'बाढ़ के लिए कुशन' का काम करेगा। लेकिन मुझे नहीं पता कि कौन सा सही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भारत सरकार दोनों विकल्पों पर विचार करेगी और तदनुसार कार्रवाई करेगी।

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