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    छतों से उड़ान भरेंगी एयर टैक्सी, शहरी जाम से राहत की नई उम्मीद

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 09:10 PM (IST)

    उद्योग संगठन सीआइआइ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बढ़ती ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए एयर टैक्सी सेवा एक प्रभावी समाधान हो सकती है। रिपोर्ट में इमा ...और पढ़ें

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    ट्रैफिक की समस्या का एयर टैक्सी बनेंगी समाधान

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और लंबी यात्रा अवधि से निपटने के लिए एयर टैक्सी सेवा एक प्रभावी समाधान बन सकती है।

    उद्योग संगठन सीआइआइ की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इमारतों की छतों का उपयोग एयर टैक्सी के टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए किया जाए तो शहरी परिवहन में मौजूद बुनियादी ढांचे की बाधाएं कम होंगी और लोगों का ट्रांजिट समय काफी घट सकेगा।

    रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम, कनाट प्लेस और जेवर एयरपोर्ट के बीच 65-75 किलोमीटर के संभावित हवाई कॉरिडोर का माॉडल भी प्रस्तुत किया गया है।

    एयर टैक्सी सेवा को बनाया जाए प्रभावी

    'नेविगेटिंग द फ्यूचर ऑफ एडवांस्ड एयर मोबिलिटी इन इंडिया' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ई-वीटीओएल) विमानों, यानी एयर टैक्सियों, को भविष्य की शहरी परिवहन प्रणाली का अहम हिस्सा बताया गया है।

    हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसके लिए विशेष वर्टिपोर्ट ढांचे की जरूरत होगी, जहां से ये विमान उड़ान भर सकें और उतर सकें।

    रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में इमारतों की छतों पर वर्टिपोर्ट विकसित करना एक किफायती और तेज समाधान साबित हो सकता है।

    ऐसे वर्टिपोर्ट व्यावसायिक केंद्रों, अस्पतालों, टेक पार्कों और रिहायशी टावरों के पास बनाए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को अपने घर या कार्यस्थल के नजदीक ही हवाई सुविधा मिल सकेगी। हालांकि वर्तमान नियमों के तहत छतों से नियमित व्यावसायिक टेक-ऑफ और लैंडिंग की अनुमति नहीं है।

    सीआइआइ ने सुझाव दिया है कि एडवांस्ड एयर मोबिलिटी क्षेत्र के लिए विशेष वित्तीय साधन विकसित किए जाएं, जैसे वेंचर लीजिंग सिस्टम और सेक्टर-विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, ताकि इस उभरती तकनीक को निवेश समर्थन मिल सके।

    परीक्षण के लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाने की भी सिफारिश की गई है—जिसमें पहले ड्रोन डिलीवरी, फिर मेडिकल लाजिस्टिक्स, अंग परिवहन और अंतत: एयर एंबुलेंस सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।

    भारत में एयर टैक्सी की स्थिति

    भारत में एयर टैक्सी या एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (एएएम) अभी शुरुआती चरण में है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों को संभावित पायलट शहरों के रूप में देखा जा रहा है।

    उम्मीद है कि भारत में 2028 तक एयर टैक्सी उड़ान भरने लगेंगी। ये हेलीकाप्टर की तरह कहीं से भी सीधे उड़ान भर सकती हैं और कहीं भी लैंड कर सकती हैं।

    दुनिया में एयर टैक्सी सेवा का हाल

    एयर टैक्सी के मामले में चीन सबसे आगे है। वहां कुछ शहरों में एयर टैक्सी सेवा शुरू हो गई है। शेन्झेन और झूहाई के बीच इंटरसिटी एयर टैक्सी शुरू की जा रही है। साथ ही एयर टैक्सियों की रेंज बढ़ाकर 200 किलोमीटर तक की जा रही है।

    अमेरिका, यूएई, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों में ई-वीटीओएल कंपनियां ट्रायल उड़ानें कर रही हैं। दुबई और लास एंजेलिस जैसे शहरों ने वर्टिपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाई है, जबकि पेरिस और टोक्यो में ओलंपिक व बड़े आयोजनों के दौरान डेमो उड़ानों की तैयारी की गई।

    एयर टैक्सी की राह में अड़चनें

    • भारत में छतों पर वर्टिपोर्ट बनाने की साफ अनुमति नहीं है और मानक वर्टिपोर्ट बनाने में लागत ज्यादा आएगी।
    • नए एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट नियमों की जरूरत, क्योंकि शहरों में कम ऊंचाई पर उड़ानें सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकती हैं।
    • चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और मेंटेनेंस सुविधाएं विकसित करना महंगा और समय खपाऊ।
    • खराब मौसम, तेज हवा और बारिश में उड़ान सुरक्षा एक बड़ी चिंता, ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ेगा।
    • एयर टैक्सी का निर्माण, संचालन और रखरखाव बहुत महंगा, किराया ज्यादा होने का खतरा।
    • भीड़भाड़ वाले शहरों में कम ऊंचाई पर उड़ान को लेकर सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं भी।
    • शहरों की मौजूदा बिल्डिंग डिजाइन और हवाई मार्गों के साथ तालमेल बैठाना भी आसान नहीं।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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