Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    क्रू की सैलरी, तेल या मेंटनेस... कहां खर्च होती है भारतीयों विमानों की कमाई; DGCA ने दिया एक-एक पैसे का हिसाब

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 06:13 PM (IST)

    भारतीय विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन एविएशन फ्यूल की लागत एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी पड़ रही है। आइए जानते हैं फ्लाइट का हर रुपया कहां-कहां ...और पढ़ें

    DGCA ने दिया फ्लाइट के एक-एक पैसे का हिसाब (जागरण)

    DGCA ने दिया फ्लाइट के एक-एक पैसे का हिसाब (जागरण)

    HighLights

    1. भारतीय एयरलाइंस का 40% परिचालन खर्च ईंधन पर।

    2. ईंधन लागत फ्लाइट क्रू सैलरी से सात गुना अधिक।

    3. रखरखाव दूसरा सबसे बड़ा खर्च, कुल का 15.8%।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में एविएशन सेक्टर तेजी के साथ बढ़ रहा है। देश में अब फ्लाइट का सफर किसी लग्जरी की जगह जरूरत बनता जा रहा है। इसके लिए हवाई यात्रा को और बेहतर बनाया जा रहा है। देश में नए और बेहतर प्लेन भी शुरू किए जा रहे हैं।

    भारत का एविएशन सेक्टर नई ऊंचाइयां छू रहा है। यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, एयरलाइंस रिकॉर्ड संख्या में विमानों के ऑर्डर देकर अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं और देश भर में नए एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।

    केंद्र सरकार ने भी विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए पिछले साल दिसंबर में नई एयरलाइंस अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को परिचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया।

    इनके अलावा उत्तर प्रदेश स्थित शंख एयर को पहले ही एनओसी मिल चुका है। इस एयरलाइन के 2026 में परिचालन शुरू होने की संभावना है।

    एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती

    भारत के एविएशन सेक्टर की इस विकास की कहानी के पीछे एक बड़ी आर्थिक चुनौती है जो एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी पड़ रही है और वो है एविएशन फ्यूल की लागत।

    डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के वित्त वर्ष 2023-24 के डेटा के मुताबिक, भारतीय एयरलाइंस अपने ऑपरेटिंग खर्च का करीब 40 प्रतिशत विमान के ईंधन और तेल पर खर्च करती हैं।

    आसान शब्दों में बात कही जाए तो एयरलाइन पर खर्च होने वाले हर 100 रुपये में से करीब 40 रुपये सिर्फ ईंधन पर खर्च होते हैं।

    ये आंकड़े बताते हैं कि तेल ही एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा ऑपरेटिंग खर्च बना हुआ है, जो रखरखाव, यात्री सेवाओं और कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य सभी लागतों से कहीं ज्यादा है।

    DGCA ने दिया एक-एक पैसे का हिसाब

    DGCA के डेटा से पता चलता है कि विमान का ईंधन और तेल कुल ऑपरेटिंग खर्च का 39.4% है। एयरलाइंस टिकट के किराये का सबसे ज्यादा खर्च तेल पर ही खर्च करती हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि ईंधन की लागत फ्लाइट क्रू की सैलरी और उससे जुड़े खर्चों पर होने वाले खर्च से सात गुना से भी ज्यादा है, जो ऑपरेटिंग लागत का केवल 5.4% है।

    DGCA ने फ्लाइट के एक-एक पैसे का हिसाब दिया है। लोगों के प्लेन में बैठने से लेकर उनके फ्लाइट से उतरने तक कहां-कहां पैसा खर्च होता है, आइए इसके बारे जानते हैं।

    इस बात को बेहतर जानने के लिए 100 रुपये के हिसाब से समझते हैं। अगर किसी एयरलाइन का खर्च 100 रुपये है तो इसमें से कहां-कहां और किस-किस चीज पर खर्च होता है।

    • भारतीय एयरलाइंस अपने ऑपरेटिंग खर्च का 39.4% हिस्सा एयरक्राफ्ट के फ्यूल और ऑयल पर खर्च करती हैं। फ्यूल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो बाकी सभी खर्चों से कहीं ज्यादा है।
    • मेंटेनेंस और ओवरहॉल पर कुल खर्च का 15.8% हिस्सा खर्च होता है।
    • फ्लाइट क्रू की सैलरी पर कुल खर्च का सिर्फ 5.4% हिस्सा ही खर्च होता है।
    • एयरलाइंस क्रू की सैलरी के मुकाबले फ्यूल पर सात गुना से भी ज्यादा खर्च करती हैं।
    • भारत में एयरलाइंस के मुनाफे को तय करने वाली सबसे अहम चीजों में से एक देश और ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की कीमतें हैं।
    DGCA flight expenses (3)

     

    खबरें और भी

    क्यों है फ्यूल की ज्यादा कीमत?

    एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से सीधे जुड़ी होती हैं। ईंधन की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव भी एयरलाइन के मुनाफे पर बड़ा असर डाल सकता है।

    इसी का नतीजा ये है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें अक्सर एयरलाइंस को किराया बढ़ाने, फ्यूल सरचार्ज लगाने या नुकसान उठाने के लिए मजबूर करती हैं।

    इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आज के समय में फ्यूल एफिशिएंसी (ईंधन की बचत) और मॉडर्न एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी कॉम्पिटिटिव फायदे बन गए हैं, क्योंकि एयरलाइंस फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से होने वाले असर को कम करना चाहती हैं।

    DGCA flight expenses (2)

    एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस भी बहुत ज्यादा खर्च

    भारतीय एयरलाइंस के लिए खर्च की दूसरी सबसे बड़ी कैटेगरी एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) है, जो कुल खर्च का 15.8% है।

    एयरलाइंस जैसे-जैसे ज्यादा एयरक्राफ्ट शामिल कर रही हैं और अपना ऑपरेशन बढ़ा रही हैं, मेंटेनेंस का खर्च और भी ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।

    भारत के घरेलू MRO इकोसिस्टम को विकसित करने के सरकारी प्रयासों का मकसद विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम करना और लंबे समय में मेंटेनेंस का खर्च घटाना है।

    DGCA flight expenses (1)

    एयरलाइंस का मुनाफा फ्यूल एफिशिएंसी पर निर्भर

    भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में से एक है, लेकिन DGCA का डेटा एक अहम सच्चाई को उजागर करता है। एयरलाइन का मुनाफा काफी हद तक फ्यूल इकोनॉमिक्स पर निर्भर करता है।

    कुल ऑपरेटिंग खर्च का लगभग दो-पांचवां हिस्सा फ्यूल पर खर्च होता है, इसलिए एयरलाइंस अपने मार्जिन को बचाने के लिए फ्यूल-एफिशिएंट एयरक्राफ्ट, रूट ऑप्टिमाइजेशन, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पहल और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

    मौजूदा समय में जैसे-जैसे यह सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, फ्यूल के खर्च को कंट्रोल करना नए यात्रियों को आकर्षित करने जितना ही जरूरी हो गया है।

    (सोर्स: डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA), भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए वित्त वर्ष 2023-24 का ऑपरेटिंग खर्च डेटा।)

    यह भी पढ़ें- Rapid Rail, Bullet Train और Pod Taxi... नोएडा एयरपोर्ट पहुंचने के 5 फ्यूचरिस्टिक तरीके, पढ़ें पूरा मास्टर प्लान