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    पेट्रोल-डीजल पर जल्द मिलेगी गुड न्यूज? सस्ते हो रहे क्रूड से तेल कंपनियों को राहत

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 08:13 PM (IST)

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सरकारी तेल कंपनियों का घाटा काफी कम हो गया है, जिससे उनके लाभ में सुधार की उम्मीद है। ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया शांति समझौते की घोषणा के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। इससे सरकारी तेल कंपनियों को होने वाला घाटा काफी कम हो चुका है और अब इनके लाभ में सुधार होने की उम्मीद है।

    ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी रिफाइनरियों और खुदरा ईंधन विक्रेताओं के पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर संयुक्त मार्जिन अब हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर है।

    तेजी से घट रही कच्चे तेल की कीमत

    इसका कारण कच्चे तेल की कम कीमतें और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती है। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात की चिंता व्यक्त की गई है कि बढ़ते कर्ज और ईंधन कर को लेकर अनिश्चितता इस क्षेत्र की लंबी अवधि की कमाई की संभावनाओं को सीमित कर सकती है।

    जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल थी, तब सरकार ने बताया था कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 23 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। पिछले सप्ताह आई रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पर यह घाटा कम होकर मात्र तीन रुपये प्रति लीटर रह गया है।

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    कंपनियों को कितना घाटा?

    मई में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, लेकिन पेट्रोल पंप पर ईंधन के दाम लागत से कम थे। हाल के महीनों में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल कंपनियों के भारी घाटे पर चिंता जताई थी।

    उन्होंने कहा था कि कंपनियां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचने पर रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं और कुल अंडर-रिकवरी करीब दो लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है।

    ऑयल कम्पनियों को लाभ की उम्मीद

    रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भंडार में पहले से मौजूद महंगे तेल के चलते तेल कंपनियों की कमाई पर दबाव रहेगा, लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही से स्थिति सुधरने की उम्मीद है। हालांकि, दो बड़े मुद्दे इस सुधार को सीमित कर सकते हैं।

    पहला, पिछले महीनों में कंपनियों ने काफी कर्ज लिया है, जिससे वैल्यूएशन प्रभावित होगा। दूसरा, मुनाफे में सुधार का बड़ा हिस्सा एक्साइज शुल्क कम करने से आया है। सरकार ने मार्च में पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, जिससे राजस्व में सालाना करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर तेल की कीमतें अगर धीरे-धीरे कम होती रहती हैं तो भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) में से बीपीसीएल और आईओसी को निकट भविष्य में सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है। एलपीजी पर नुकसान अभी भी ज्यादा है, लेकिन कच्चे तेल की कीमत कम होने से इसमें भी राहत मिलने की उम्मीद है।

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