Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    फ्लाइओवर्स की डबल चेकिंग, IIT भी करेंगे NHAI के पुलों के डिजाइन की जांच; चूक ही नहीं कोई गुंजाइश

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 10:00 PM (IST)

    एनएचएआई ने 100 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए बनने वाले पुलों की डिजाइन की जांच अब आईआईटी और अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों से कराने का निर्णय लिया है। ...और पढ़ें

    IIT करेंगे फ्लाईओवर्स के डिजाइन की जांच

    IIT करेंगे फ्लाईओवर्स के डिजाइन की जांच

    HighLights

    1. पुलों की डिजाइन जांच अब आईआईटी करेंगे।

    2. 100 वर्ष से अधिक के पुलों पर विशेष ध्यान।

    3. राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पुलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम पहले ही बना चुका है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस दिशा में और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

    प्राधिकरण ने तय किया है कि 100 वर्ष या उससे अधिक की समयावधि को ध्यान में रखते हुए बनाए जाने एनएचएआइ नेटवर्क के पुलों की डिजाइन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थान जांचेंगे। एनएचएआइ के इंजीनियरों से इतर इन संस्थानों के विशेषज्ञ स्वतंत्र जांच करेंगे।

    एनएचएआइ ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की सुरक्षा, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थायित्व बनाए रखने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

    अब सभी नई परियोजनाओं में प्रमुख पुलों की हाइड्रोलिक स्टडी और डिजाइन की स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से जांच के लिए आइआइटी और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों को सूचीबद्ध किया जाएगा।

    इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण से पहले 100 वर्ष या उससे अधिक के समय के लिए डिजाइन किए गए प्रमुख पुलों की सख्ती से स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की जाए।

    IIT करेंगे पुलों की डिजाइन की जांच

    आइआइटी दिल्ली, आइआइटी मुंबई, आइआइटी रुड़की, आइआइटी खड़गपुर सहित लगभग 12 आइआइटी और कई अन्य प्रमुख संस्थानों ने इस सिलसिले में एनएचएआइ के साथ सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की है।

    एनएचएआइ अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से महत्वपूर्ण पुल परियोजनाओं की डिजाइन की समीक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी संस्थागत ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।

    यह ढांचा पुलों की उच्च गुणवत्ता के प्रति आश्वस्त करेगा। ये संस्थान संरचनात्मक डिजाइन संबंधी गणनाओं, इंजीनियरिंग लेआउट, निर्माण पद्धतियों, भू-तकनीकी जांचों और हाइड्रोलिक अध्ययनों की समीक्षा करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम नामक पोर्टल पुराने पुलों के रखरखाव और मरम्मत की सतत निगरानी के उद्देश्य से बनाया गया है।

    यह भी पढ़ें- भारत का Visa पाने के लिए उमड़ रहे बांग्लादेशी, दो साल बाद फिर से खुले सेंटर; टूरिस्ट वीजा सर्विस भी बहाल