तीन गुना हो जाएगी पेंशन की रकम, सरकार करने जा रही बढ़ोतरी; संसदीय समिति ने की सिफारिश
संसदीय समिति ने ₹1000 की न्यूनतम मासिक ईपीएफ पेंशन को अपर्याप्त बताया है और तत्काल बढ़ोतरी की सिफारिश की है। समिति ने इसे सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने पर ...और पढ़ें

न्यूनतम मासिक पेंशन 7500 रुपए किए जाने की कर्मचारी संगठनों की मांग को एक मजबूत

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अब संसदीय समिति ने भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े ईपीएफ से जुड़े न्यूनतम 1000 रुपए की मासिक पेंशन को बेहद अपर्याप्त बताते हुए इसमें बढ़ोतरी की जरूरत बताई है। ईपीएफ की न्यूनतम पेंशन में तत्काल इजाफे की सिफारिश करते हुए समिति ने साफ कहा है कि वर्तमान दौर की जरूरतों के मद्देनजर इसे अधिक वास्तविक ही नहीं बल्कि सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाना चाहिए।
संसदीय समिति की इस सिफारिश ने लंबे अरसे से ईपीएफ के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन 7500 रुपए किए जाने की कर्मचारी संगठनों की मांग को एक मजबूत आधार दे दिया है। वैसे सूत्रों के अनुसार सरकार पहले से ही पेंशन को बढ़ाकर ढाई हजार से तीन हजार करने पर विचार कर रही है।
1000 रुपए की न्यूनतम पेंशन जस की तस
समिति के अनुसार बढ़ती महंगाई के बावजूद बहुत लंबे समय से 1000 रुपए की न्यूनतम पेंशन जस की तस बनी हुई है और सबूतों की जांच में पाया गया कि न्यूनतम पेंशन में वृद्धि के लिए पेंशनभोगियों से बहुत से आवेदन मिले हैं। खासकर बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थियों की वित्तीय कठिनाइयों को देखते हुए इसमें वृद्धि की जरूरत है।
समिति के अनुसार केंद्र सरकार पहले से ही इस योजना को वित्तीय सहायता दे रही है जिसमें ईपीएफ के मौजूदा सदस्यों के लिए 1.16 प्रतिशत का योगदान और 1000 मासिक न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए दिया जाने वाला बजटीय आवंटन शामिल है। न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी के लिए समिति ने श्रम मंत्रालय से बजटीय सहायता बढ़ाने की संभावनाओं को तलाशने का सुझाव दिया है ताकि पेंशनभोगियों को आज के जीवन-यापन के खर्चों के अनुरूप एक उचित न्यूनतम पेंशन मिल सके।
स्थाई समन्वय और संवाद बोर्ड के गठन की सिफारिश
भाजपा सांसद बासवराज बोम्मई इस संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं। नए लेबर कोड की सराहना करते हुए समिति ने केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल कर स्थाई समन्वय और संवाद बोर्ड के गठन की सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि बोर्ड को मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन की भी देखरेख करनी चाहिए।
राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी स्तर (एनएफएलएमडब्लू) रिपोर्ट में जीवन यापन की बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी स्तर में ऊपर की ओर संशोधन की भी सिफारिश की है। समिति ने एग्रीगेटर्स द्वारा ई-श्रम पोर्टल पर गिग वर्कस का पंजीकरण अनिवार्य करने की सिफारिश करते हुए सरकार से एग्रीगेटर की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने के लिए भी कहा है।
ताकि गिग वर्कर्स को बीमा और दुर्घटना कवर जैसी सामाजिक सुरक्षा मिल सके। जबकि अनुबंध श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाने की जरूरत बताते हुए कहा है कि यह देखते हुए कि कई अनुबंध श्रमिकों को दुर्घटना के बाद राहत मिलने में देरी का सामना करना पड़ता है।
3.5 करोड़ नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य
यह जरूरी है कि ईएसआई और भविष्य निधि संगठन की योजनाओं के तहत समय पर कवरेज सुनिश्चित किया जाए। वहीं बाल श्रम उन्मूलन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में समिति ने सर्व शिक्षा अभियान के साथ राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के विलय पर पुनर्विचार की सिफारिश की है।
'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' की रियल टाइम निगरानी की जरूरत बताते हुए समिति ने कहा है कि जुलाई 2027 तक 3.5 करोड़ नौकरियां पैदा करने के लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है। वहीं नए लेबर कोड में बढ़ी हुई जिम्मेदारियों को देखते हुए श्रम मंत्रालय से खान सुरक्षा महानिदेशालय में खाली पड़े पदों को जल्द भरने और आधुनिक निगरानी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए कदम उठाने की सलाह दी है।
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