'एआईएडीएमके पतन की ओर', विजय के पक्ष में बागी विधायकों ने किया था वोट, EPS ने CV शनमुगम समेत कई नेताओं को पद से हटाया
विजय के पक्ष में मतदान करने के बाद, ईपीएस ने सीवी शनमुगम सहित एआईएडीएमके के कई पदाधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है। यह कार्रवाई पार्टी के भीतर चल ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के पक्ष में वोट देने वाले 24 विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के लिए आज स्पीकर के पास याचिका दाखिल कर दी है। साथ ही नेताओं को सभी बड़े पदों से हटा दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने कल जारी पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, जिसमें उन्हें TVK सरकार के खिलाफ वोट देने का साफ निर्देश दिया गया था।
25 सदस्यों ने किया व्हिप का खुला उल्लंघन
AIADMK के वरिष्ठ नेताओं ने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लगभग 25 सदस्यों ने व्हिप का खुला उल्लंघन किया है, इसलिए वे अपनी विधायकी कुर्सी गंवाने के हकदार हैं। पार्टी ने CV शनमुगम, SP वेलुमणि, C विजयभास्कर समेत अन्य नेताओं को उनके पार्टी पदों से भी हटाने की मांग की है।
विजय को सदन में ऐसे मिला बहुमत
आज सदन में बहुमत परीक्षण के दौरान विजय की पार्टी के पास 105 विधायक थे। विजय ने एक सीट छोड़ दी थी, एक स्पीकर थे और एक विधायक की जीत को अदालत में चुनौती दिए जाने के कारण वोटिंग से रोका गया था। इस परीक्षण में विजय को 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि 22 ने उनके खिलाफ वोट किया। पांच विधायकों ने मतदान में भाग नहीं लिया। MK स्टालिन की DMK के 59 विधायक सदन से वॉकआउट कर बाहर चले गए।
दलबदल विरोधी कानून का दिया हवाला
AIADMK नेताओं ने कहा, 'राजनीतिक दल को शिकायत दर्ज करानी होती है और हमने वह शिकायत आज जमा कर दी है। अगर कोई सदस्य पार्टी के व्हिप के विरुद्ध वोट करता है तो दलबदल विरोधी कानून अपनेआप लागू होता है।' पार्टी ने साफ किया कि बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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एआईएडीएमके नेता सीवी शनमुगम ने बुधवार को पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी पर जमकर निशाना साधा, जब एआईएडीएमके के भीतर गहराते विद्रोह के बीच उन्हें, एसपी वेलुमणि, सी विजयभास्कर और कई अन्य नेताओं के साथ पार्टी के प्रमुख पदों से हटा दिया गया।
शनमुगम ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मृत्यु के बाद ईपीएस के नेतृत्व संभालने के बाद से पार्टी को लगातार चुनावी झटके लगे हैं। पलानीस्वामी द्वारा बार-बार चुनाव हारने पर की गई आलोचना के जवाब का जिक्र करते हुए शनमुगम ने कहा कि आज जब महासचिव (ईपीएस) से पूछा जाता है कि हम क्यों हारे, तो वे पूछते हैं, 'क्या एआईएडीएमके 1996 में नहीं हारी थी? क्या हम 2006 में भी नहीं हारे थे?' हां, हम हारे थे। लेकिन पुरची थलाइवी अम्मा में पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की क्षमता थी।'
जयललिता के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि हर हार के बाद, अम्मा यह घोषणा करती थीं कि वह एमजीआर के शासन को फिर से स्थापित करेंगी, और वह पार्टी को दूसरी बार सत्ता में लाने में सफल रहीं। 1998 के संसदीय चुनावों में अम्मा ने ही भारी जीत दिलाई थी। न तो जीत से उपजे अहंकार का कोई भाव था और न ही हार के बाद छिपने की प्रवृत्ति।
शन्मुगम ने आगे आरोप लगाया कि ईपीएस के नेतृत्व में एआईएडीएमके की चुनावी स्थिति और खराब हो गई है। उन्होंने कहा, "विशेष रूप से कहें तो, महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी के पदभार संभालने के बाद से न केवल हार का सिलसिला जारी रहा है, बल्कि हमें कम से कम अपनी सीटों की संख्या में वृद्धि करनी चाहिए थी। इसके बजाय, हर चुनाव के साथ हमारी हार और भी गंभीर होती गई है, और हम लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं।
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