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    सोना-चांदी-तांबा सब हुआ सस्ता, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से किन-किन चीजों की कीमत हुई कम?

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 10:13 PM (IST)

    ईरान-अमेरिका युद्धविराम और होर्मुज के खुलने से कच्चे तेल सहित औद्योगिक जिंसों की कीमतों में 20% तक की गिरावट आई है। ...और पढ़ें

    सोना-चांदी की कीमत में पिछले एक महीने में भारी गिरावट (प्रतीकात्मक फोटो)

    सोना-चांदी की कीमत में पिछले एक महीने में भारी गिरावट (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. ईरान-अमेरिका युद्धविराम से औद्योगिक जिंसों के दाम गिरे।

    2. कच्चे तेल की कीमत 15% कम होकर 73 डॉलर प्रति बैरल।

    3. कम लागत से घरेलू और निर्यात मांग को मिलेगा बढ़ावा।

    राजीव कुमार, नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्धविराम के एलान और होर्मुज के खुलने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल समेत विभिन्न औद्योगिक जिंसों की कीमतों में पिछले एक माह में 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

    जानकारों का कहना है कि ऐसे में आयात बिल में कमी के साथ निर्माण लागत भी कम होगी, जिससे घरेलू और निर्यात दोनों मांग को मजबूती मिलेगी। इसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

    15 फीसद कम हुई कच्चे तेल की कीमत

    ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गई है जो पिछले महीने के मुकाबले 15 प्रतिशत तक कम है। कच्चे तेल की कीमत ढुलाई और यातायात लागत के साथ प्लास्टिक जैसे कई आइटम के दाम को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमत कम होने पर आयात बिल भी कम होगा, जिससे रुपये को मजबूती मिलेगी और चालू खाते का घाटा भी कम होगा।

    वहीं शुक्रवार को जारी वित्त मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट में विभिन्न प्रकार के स्टॉक को बढ़ाने के साथ पानी के बफर को भी मजबूत करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, अल नीनो के असर से बारिश में सामान्य के मुकाबले 43 प्रतिशत की कमी आ चुकी है।

    जानकारों का कहना है कि सरकार के पास चावल का पूरा स्टॉक है और धान की बुवाई भी खास प्रभावित नहीं हुई है। सोयाबीन, दाल, कॉटन जैसी वस्तुओं की बुवाई में कमी आई है जो भविष्य में महंगाई को समर्थन दे सकती है।

    एचडीएफसी की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता कहती हैं, पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम से कच्चे तेल व अन्य वस्तुओं के दाम में कमी आई है। इस कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू विकास दर में कमी की आशंका कम हो गई है।

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    परंतु अल नीनो की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई और ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है। पहले भी अल नीनो के कारण बारिश कम होने पर कृषि उत्पादन और घरेलू मांग प्रभावित हो चुके है।

    मुख्य अनाज का हमारे देश में पूरा बफर है और अगले एक-दो महीने में बारिश हो जाती है तो बुवाई का एरिया बढ़ सकता है। कच्चे तेल और औद्योगिक आइटम के दाम कम होने से लागत में कमी आएगी जिससे निर्यात और बढ़ेगा। -एसपी शर्मा, मुख्य अर्थशास्त्री, उद्योग संगठन एसोचैम

    पिछले एक माह में किन वस्तुओं के दाम में कितनी कमी आई है?

    • कच्चे तेल- 15 प्रतिशत
    • सोना- 11 प्रतिशत
    • चांदी- 20 प्रतिशत
    • तांबा- 6.5 प्रतिशत
    • एल्युमिनियम- 17 प्रतिशत
    • जिंक- 3.0 प्रतिशत
    • लौह अयस्क- 4.5 प्रतिशत
    • स्टील- 4.0 प्रतिशत
    • प्लेटिनम- 18 प्रतिशत
    • सोयाबीन- 5.8 प्रतिशत
    • पाम- 2.0 प्रतिशत
    • रबर- 9.0 प्रतिशत

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