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    GST काउंसिल की बैठक में कारोबारियों को मिलेगी राहत, रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रोसेस होगा आसान

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 11:30 PM (IST)

    मानसून सत्र के बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक होगी, जिसमें कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। ...और पढ़ें

    मानसून सत्र के बाद होगी GST काउंसिल की बैठक। (फाइल)

    मानसून सत्र के बाद होगी GST काउंसिल की बैठक। (फाइल)

    HighLights

    1. मानसून सत्र के बाद होगी जीएसटी काउंसिल की बैठक।

    2. कारोबारियों को केंद्रीकृत पंजीकरण से मिलेगी बड़ी राहत।

    3. इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड प्रक्रिया में आएगी तेजी।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में कारोबारियों को राहत मिल सकती है। यह बैठक संसद के मानसून सत्र के बाद ही आयोजित की जाएगी। इससे पहले जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक पिछले साल सितंबर में आयोजित की गई थी जिसमें जीएसटी दरों के स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया था जिससे रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं सस्ती हो गई।

    हालांकि जीएसटी विशेषज्ञों का कहना है कि हर तीन माह में एक बार जीएसटी काउंसिल की बैठक का आयोजन किया जाना चाहिए, लेकिन पिछले 10 महीनों से काउंसिल की बैठक नहीं बुलाई गई है। मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है।

    सूत्रों का कहना है कि पिछली बैठक में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली तो आगामी बैठक में कारोबारियों को राहत मिल सकती है। अभी कारोबारियों को अलग-अलग राज्य में कारोबार करने के लिए अलग-अलग पंजीयन कराना होता है। काउंसिल की आगामी बैठक में इस पंजीयन को केंद्रीकृत रूप से एक जगह ही कराने का फैसला किया जा सकता है।

    इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड में तेजी पर फैसला संभव

    आगामी बैठक में इंवर्टेड ड्यूटी व इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड में तेजी लाने को लेकर भी फैसला किया जा सकता है। कई ऐसे आइटम होते हैं जिनके कच्चे माल पर अधिक शुल्क होता है तो तैयार माल पर कम। ऐसे में रिफंड लेने में दिक्कत होती है।

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    जिस कारोबारी से निर्माता ने माल खरीदा है और उसने अगर अपना जीएसटी फाइल नहीं किया है और निर्माता कारोबारी ने जीएसटी फाइल कर दिया है तो भी निर्माता को इनपुट टैक्स रिफंड नहीं मिल पाता है। ऐसे विभिन्न नियमों के कारण कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का रिफंड मिलने में देर होती है जिससे उनकी पूंजी फंस जाती है।

    पेट्रोल-डीजल पर चर्चा की कोई संभावना नहीं 

    सूत्रों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में पेट्रोल-डीजल पर चर्चा की कोई संभावना नहीं है। मार्च में पश्चिम एशिया संकट के दौरान इस बात को लेकर चर्चा चली थी कि पेट्रोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि ग्राहकों को केंद्र व राज्य दोनों को अलग-अलग टैक्स नहीं देना पड़े।

    जानकारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वैट राज्य सरकार के राजस्व का बड़ा माध्यम है। इसे कोई भी राज्य सरकार छोड़ने के लिए तैयार नहीं होगी।