धमकियां भी नहीं डिगा पाईं हौसला, हेड कांस्टेबल रेवती की निडर गवाही से 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान व्यापारी पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की हिरासत में क्रूर या ...और पढ़ें

हेड कांस्टेबल रेवती की निडर गवाही से 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा (फोटो- एक्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान व्यापारी पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की हिरासत में क्रूर यातना देकर हत्या के मामले में मदुरै की पहली अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने एक दुर्लभ फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कही ये बात
अदालत ने सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई और कुल 1.4 करोड़ रुपये का मुआवजा परिवार को देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी का बताते हुए कहा कि जिन्हें कानून की रक्षा करनी थी, उन्होंने ही सत्ता के दुरुपयोग और अमानवीय बर्बरता का प्रदर्शन किया।
रेवती की साहसिक गवाही निर्णायक साबित हुई
इस फैसले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना हेड कांस्टेबल एस. रेवती की गवाही। उस रात सथानकुलम थाने में ड्यूटी पर तैनात रेवती ने धमकियों, संस्थागत दबाव और सहयोगियों की अवहेलना करते हुए मजिस्ट्रेट एम.एस. भरथिदासन के सामने पूरी घटना का खुलासा किया।
रेवती की गवाही
रेवती के अनुसार, वह रात साढ़े आठ बजे करीब पुलिस स्टेशन आई तो एक कमरे से चीखने की आवाजें आ रही थीं। उस समय पुलिसकर्मियों ने पिता-पुत्र को लाठियों और जूतों से बुरी तरह पीटा। प्रताड़ना इतनी वीभत्स थी कि उनके निजी अंगों को भी नहीं बख्शा गया और बूटों से दोनों के प्राइवेट पार्ट पर मारा।
मारपीट के बीच पुलिसकर्मी शराब पीने के लिए रुकते और फिर दोगुने उत्साह से पिता-पुत्र पर हमला करते। इतना ही नहीं गंभीर रूप से घायल पीड़ितों से ही फर्श पर फैला उनका खून साफ करवाया गया।
आगे रेवती ने बताया कि जब जयराज और फेनिक्स अर्ध-बेहोशी की हालत में थे, रेवती ने उन्हें कॉफी देने की कोशिश की, जिसे अन्य पुलिसकर्मियों ने फेंक दिया। उन्हें नग्न कर बांध दिया गया था। रेवती ने न केवल यह भयावह सच मजिस्ट्रेट को बताया, बल्कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान भी की।
क्या था पूरा मामला?
19 जून 2020 को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में जयराज और बेनिक्स को सथानकुलम पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया। दोनों पर मोबाइल शॉप खुली रखने का आरोप था। हिरासत में दोनों को इतनी क्रूर यातना दी गई कि बेनिक्स की 22 जून को और जयराज की 23 जून को मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों और खून बहने के निशान मिले।
मामले में शुरू में स्थानीय पुलिस और सीबीआई-सीआईडी की जांच हुई, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई। सीबीआई ने 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक की बाद में कोविड से मौत हो गई।
दोषी पुलिसकर्मी
अदालत ने निम्नलिखित 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई:
- इंस्पेक्टर एस. श्रीधर
- सब-इंस्पेक्टर के. बालकृष्णन
- पी. रघु गणेश
- हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन
- ए. समदुराई
- कांस्टेबल एम. मुथुराज
- एस. चेल्लादुरई
- एक्स. थॉमस फ्रांसिस
- एस. वेलुमुथु
कोर्ट ने कुल 1.4 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसमें यदि दोषी भुगतान नहीं करते तो उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी।
रेवती का साहस: एक मिसाल
रेवती ने अपने सहयोगियों के खिलाफ गवाही देकर न केवल न्याय की जीत सुनिश्चित की, बल्कि पुलिस बल में जवाबदेही की मिसाल भी पेश की। उन्होंने बाद में कहा कि 'कानून के सामने सब बराबर हैं' और इसीलिए उन्होंने सच बोलने का फैसला किया, भले ही इसमें अपनी और परिवार की सुरक्षा को खतरा हो।
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