कच्चे तेल का इतिहास: 175 साल पहले जमीन के नीचे मिला क्रूड ऑयल, चिड़िया और व्हेल ने कैसे मिटाया दुनिया का अंधेरा?
कच्चे तेल की खोज करने में मानव को कई साल लग गए। आज जिस तेल के लिए दुनिया में जंग छिड़ी है, 175 साल पहले तक इस तेल के बारे में लोग कुछ नहीं जानते थे। फ ...और पढ़ें
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कच्चे तेल की खोज ने रचा था इतिहास (जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर प्रतिबंध लगाने की वजह से दुनियाभर में लोग पेट्रोल-डीजल की भारी कीमतों का सामना कर रहे हैं।
आज के समय में पेट्रोल-डीजल से लेकर सभी जीवाश्म ईंधनों पर लोगों की निर्भरता काफी ज्यादा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया में इस कच्चे तेल का इजात ही नहीं हुआ था, तब लोग कैसे जीते थे।
कच्चे तेल के बिना कैसी थी लोगों की जिंदगी?
आज से करीब 175 साल पहले तक लोगों को पेट्रोल-डीजल तो क्या केरोसिन ऑयल के बारे में भी कुछ नहीं पता था। लोग अंधेरे में अपना जीवन बिता रहे थे।
रात होते ही लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल था। अंधेरा होते ही लोग घरों में कैद हो जाते थे। आज के समय में ऐसे हालात के बारे में सोचना काफी खौफनाक लग सकता है, लेकिन पहले के समय में ये बात बहुत आम थी।
चिड़िया जलाकर रोशनी करते थे लोग
1700 से पहले के समय में लोग रात में यात्रा करने से कतराते थे। लेकिन जब कभी उन्हें जरूरत पड़ती थी, तब उन्होंने इसके लिए भी विकल्प तलाश रखे थे।
क्रूड ऑयल की खोज से पहले लोग एक विशेष तरह की 'पेट्रेल' नाम की चिड़िया का शिकार करते थे और उसे कई दिन तक घर में सुखाते थे।
लोगों को रात में रोशनी करने की जब कभी जरूरत पड़ती थी, तब उस चिड़िया को एक लोहे के स्टैंड पर रखकर जलाते थे। 'सेल्मन फिश' का भी लोग इसी तरह इस्तेमाल करते थे। सेल्मन फिश या पेट्रेल चिड़िया को जलाने से घंटों तक सड़कों पर रोशनी रहती थी।
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लोगों ने निकाला व्हेल का तेल
1700 से 1850 के समय में लोगों ने रोशनी करने के लिए नई तकनीकों का इजात कर लिया। लोगों ने बड़ी संख्या में व्हेल मछली का शिकार करना शुरू कर दिया और इसके तेल से लैंप जलाना शुरू किया।
अमेरिका ने व्हेल मछली का तेल निकालकर दुनिया को बेचा और इस कारोबार में महारथ हासिल कर ली। लेकिन व्हेल मछली का शिकार करना कई लोगों को पसंद नहीं था, इसके लिए लोगों ने नए विकल्पों की तलाश शुरू की।
केरोसीन ऑयल की खोज ने मिटाया अंधेरा
साल 1846 में वो समय आया, जब दुनिया को केरोसीन तेल मिला। कनाडा के आविष्कारक अब्राहम पाइनियो गेस्नर ने दुनिया से अंधेरा मिटा दिया। अब्राहम पाइनियो गेस्नर ने कोयला, कोलतार और ऑयल शेल को रिफाइन करके केरोसिन ऑयल यानी मिट्टी का तेल बनाया।
केरोसिन ऑयल काफी ज्यादा सस्ता था। व्हेल से बनने वाले तेल की तुलना में केरोसीन ऑयल की कीमत आधी थी। इस तेल को गरीब से लेकर अमीर तक हर कोई खरीद सकता था।
कच्चे तेल की खोज ने बदली दुनिया
केरोसिन ऑयल की खोज के बाद भी बेहतर फ्यूल की तलाश जारी रही। साल 1858 में अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज के एक प्रोफेसर जॉर्ज बिसेल यूनाइटेड स्टेट्स के ही पेंसिल्वेनिया राज्य के कुछ ग्रामीण इलाकों में पहुंचे। यहां उन्हें चिकना-सा पदार्थ मिला, जिसका सैंपल वो अपने कॉलेज लेकर चले गए।
प्रोफेसर जॉर्ज बिसेल ने इस पदार्थ को रिफाइन कर लिया और पता लगाया कि इस पदार्थ का इस्तेमाल लैम्प जलाने में किया जा सकता है। बिसेल को ये अंदाजा हो गया कि पेंसिल्वेनिया के इलाकों में जमीन के नीचे ऐसा तरल पदार्थ भारी मात्रा में मौजूद हो सकता है।

बिसेल ने एडविन ड्रेक की मदद से विलियम स्मिथ नाम के शख्स को हायर किया और इन सभी ने मिलकर जमीन के नीचे सालों से छिपे तेल की खोज शुरू की। विलियम स्मिथ को अंकल बिली के नाम से भी जाना जाता था। ये घरों में पानी के नल लगाने का काम करते थे।
बिसेल, एडविन ड्रेक और विलियम स्मिथ जब जमीन में तेल खोज रहे थे, तब लोग उनका मजाक उड़ाते थे। उस दौरान लोगों का बस यही मानना था कि जमीन के नीचे केवल पानी मिल सकता है, तेल नहीं।
जमीन से 69 फीट नीचे मिला तेल
टाइटसविले इलाके में बड़ी मशक्कत के बाद 60 फीट तक ड्रिलिंग होने के बाद एडविन ड्रेक और अंकल बिली उम्मीद हार गए थे कि उन्हें तेल कभी मिल भी पाएगा। उन्होंने काम को रोकने के लिए बिसेल से बात करने के बारे में सोचा।
28 अगस्त 1859 का दिन जब एडविन ड्रेक बिसेल से काम रोकने के लिए बात करने गए थे, लेकिन अंकल बिली निराशा के बाद भी काम कर रहे थे। इस दोपहर जब करीब 69 फीट की ड्रिलिंग हो चुकी थी, तब अंकल बिली का बेटा ड्रिलिंग कर रहा था।
अंकल बिली के बेटे ने खुदाई के दौरान जब जमीन से मिट्टी को निकाला, तब उस मिट्टी के साथ पाइप के निचले हिस्से में एक बदबूदार तरल पदार्थ भी बाहर आया। बिली का बेटा तुरंत उनके पास दौड़कर आया और बोला कि 'पापा तेल मिल गया'।
अंकल बिली और उनके बेटे ने जमीन से 69 फीट नीचे तेल निकाल लिया था, लेकिन बिसेल और एडविन ड्रेक इस बात से पूरी तरह अंजान थे। अगले दिन जब एडविन ड्रेक, अंकल बिली से काम बंद करने के बारे में कहने पहुंचे, तब उन्होंने देखा कि ड्रिलिंग साइट पर भारी भीड़ इकट्ठा है।
एडविन ड्रेक ने जब पास जाकर देखा तो बड़े-बड़े ड्रमों में और कंटेनर में कच्चा तेल भरा हुआ था। अंकल बिली ने ड्रेक को देखते ही गले लगा लिया।
20 डॉलर में बिका एक बैरल तेल
अमेरिकी जानकारों के मुताबिक, एडविन ड्रेक और अंकल बिली जिस इलाके में ड्रिलिंग कर रहे थे, वो जगह टाइटसविले से करीब 11 किमी दूर थी।
एडविन ड्रेक और बिसेल ने जहां से तेल निकाला, वहां तेल के कुएं के चार-छह किलोमीटर के इलाकों को बाहर से आए लोगों ने खरीदना शुरू कर दिया और वहां मकान बनाने शुरू कर दिए। इसके साथ ही बड़े स्तर पर ड्रिलिंग का काम शुरू हो गया।
यहां 20 डॉलर में एक बैरल तेल बिकना शुरू हो गया था। अमेरिका में यह शहर जल्द ही ऑयल सिटी के नाम से जाना जाने लगा।

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