रसोई गैस की कोई कमी नहीं, ढाई दिन में LPG की होगी डिलीवरी; केंद्र ने राज्यों के लिए भी बनाया स्पेशल प्लान
पश्चिम एशिया में तनाव और रसोई गैस की किल्लत की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने र ...और पढ़ें

रसोई गैस की कोई कमी नहीं। (पीटीआई)

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों से रसोई गैस की किल्लत की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एहतियाती कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों को अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन जारी करने का आदेश दिया है।
आमतौर पर सरकारी तेल कंपनियां हर तिमाही राज्यों को करीब एक लाख किलोलीटर केरोसिन का कोटा जारी करती हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
साथ ही कोयला मंत्रालय ने सरकारी कंपनियों कोल इंडिया व सिंगारेनी कोयलिरीज कंपनी को निर्देश दिया है कि वे राज्यों को जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराएं ताकि गैर-घरेलू उपभोक्ताओं जैसे होटल, रेस्टोरेंट आदि को कोयला को बतौर ईंधन दिया जा सके।

पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं
उक्त जानकारी पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में पश्चिम एशिया संकट की वजह से वैश्विक इनर्जी आपूर्ति के बाधित होने की स्थिति सरकार की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देते हुए दी। पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने संसद में कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से काम कर रही है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एटीएफ और फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है। देशभर के रिटेल आउटलेट्स पर पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और इन उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से चल रही है। राज्यों को पीडीएस के तहत अतिरिक्त केरोसिन भी जारी किया गया है।
ईंधनों पर दबाव कम
'बाद में पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से अलग से उपरोक्त कदमों की जानकारी दी गई। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से भी कहा है कि वे गैर-आवासीय क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर कोयला, बायोमास और केरोसिन को ईंधन के रूप में उपयोग की अनुमति दें।
इससे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाकर गैस और अन्य ईंधनों पर दबाव कम किया जा सकेगा। अभी प्रदूषण नियमों की वजह से कोयला व बायोमास का आम तौर पर इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
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एलएनजी कार्गो रोजाना पहुंच रहे
पुरी ने बताया कि सरकार ने गैस आपूर्ति को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ते हुए वैकल्पिक स्त्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा, 'रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इकाइयों में गैस खपत में नियंत्रित कमी की गई है ताकि गैस को प्राथमिक क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जा सके। वैकल्पिक मार्गों से बड़े एलएनजी कार्गो लगभग रोजाना पहुंच रहे हैं, जिससे संभावित लंबा संघर्ष होने की स्थिति में भी गैस आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था है।'
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उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों की रसोई तक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी तक का औसत समय 2.5 दिन बना हुआ है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक
पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने 11 मार्च को राज्यों के प्रशासन के साथ बैठक कर आपूर्ति स्थिति और प्राथमिकता व्यवस्था की जानकारी दी। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कई राज्यों के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
पुरी ने कहा कि जिलास्तर पर निगरानी समितियां बनाई जा रही हैं और ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए कई राज्यों में छापेमारी भी की गई है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है और राज्यों के साथ मिलकर 'सहकारी संघवाद' की भावना के तहत इसका सामना किया जा रहा है।
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