Budget 2026: चीन की चाल और ट्रंप के टैरिफ का तोड़, सेमीकंडक्टर-रेयर अर्थ का हब बनेगा भारत; क्या है प्लान?
बजट 2026-27 में भारत ने चीन पर महत्वपूर्ण घटकों जैसे रेअर अर्थ मैग्नेट, सेमीकंडक्टर और विशेष रसायनों की निर्भरता कम करने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किय ...और पढ़ें

ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में एक डेडिकेटेट कॉरिडोर स्थापित किया जाएगा
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। आम बजट 2026-27 में बिग टिकट घोषणाएं भले ही ना हो लेकिन इसमें बहुत ही करीने से चीन पर रेअर अर्थ मैग्नेट से लेकर बड़े सुरंग खोदने वाले मशीनों और बेहद उन्नत उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों पर भारत की निर्भरता को घटाने का स्पष्ट रोडमैप पेश कर दिया गया है।
इन क्षेत्रों में पहले से ही अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ के साथ भारत सहयोग करने को तैयार है लेकिन इस बजट के जरिए घरेलू स्तर पर किस तरह से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल व अन्य उपकरणों में आत्मनिर्भर बना जाए, इसका भी रास्ता तैयार किया गया है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम 2.0) की घोषणा कर यह संकेत दिया गया है कि अब सिर्फ चिप बनाने की इकाइ स्थापित करने से काम नहीं चलेगा बल्कि इसके लिए जरूरी उपकरण, कच्चे माल, फुल-स्टैक भारतीय आई डिजाइन और भरोसेमंद सप्लाई चेन भी स्थापित करना होगा। इसके लिए उद्योगों के नेतृत्व वाले रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित कर कुशल कार्यबल तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।
आम बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इस्तेमाल करने वाले उपकरणों के लिए व्यय 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इस बारे में एक योजना अप्रैल, 2025 मे शुरू की गई थी और सरकार के प्रस्ताव से दोगुना निवेश इसमें आ चुका है। अब इस राशि को बढ़ा कर 40 हजार करोड़ रुपये किया जा रहा है। इससे मोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरणों में चीन से आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता घटेगी।

इसी तरह से रेअर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स को लेकर वित्त मंत्री ने बताया है कि इन खनिजों में संपन्न राज्यों जैसे ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में एक डेडिकेटेट कॉरिडोर स्थापित किया जाएगा। इस तरह की एक योजना नवंबर, 2025 में शुरु हुई थी लेकिन अब उसका विस्तार होगा। डेडिकेटेड कॉरिडोर न होने से रेअर अर्थ की खनन से लेकर उनके प्रसंस्करण, शोध व मैन्यूफैक्चरिंग को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।
रेअर अर्थ मैग्नेट्स की वैश्विक सप्लाई पर चीन का दबदबा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उपकरणों और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद जरूरी हैं। पिछले वर्ष चीन ने भारत समेत कई देशों को इसकी आपूर्ति रोक दी थी इससे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में हड़कंप मच गया था। इसी तरह से विशेष रसायन का उपयोग पूरी दुनिया में बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण से लेकर सौर ऊर्जा पैनल व चिप बनाने में इनकी जरूरत बढ़ती जा रही है।

यहां आम बजट में घोषणा है कि राज्यों के सहयोग से तीन विशेष केमिकल पार्क की स्थापना की जाएगी। क्लस्टर-आधारित इन पार्कों से घरेलू उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की रणनीति सामने आती है। बजट में कंटेनर निर्माण क लिए 10 हजार करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम की घोषणा की गई है। यह राशि अगले पांच वर्ष में आवंटित की जाएगी। भारत ही नहीं तकरीबन पूरी दुनिया आज की तारीख में कंटेनर के लिए चीन पर निर्भर है। निर्यात बढ़ने के साथ ही भारत में इसकी मांग बढ़ने जा रही है।
इसी तरह से बजट में टनल बोरिंग मशीन, लिफ्ट, फायर-फाइटिंग उपकरण, मेट्रो और हाई-एल्टीट्यूड रोड निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी को घरेलू स्तर पर बनाने के लिए अलग अलग घोषणाएं की गई हैं। हाल ही में भारत व चीन के विदेश मंत्रालयों की बैठक हुई थी जिसमें भारत की तरफ से खास तौर पर टनल बोरिंग मशीन की आपूर्ति का आग्रह किया गया था। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर सरकार इस रणनीतिक निर्भरता को कम करना चाहती है।
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