चीन है कि सुधरता नहीं... ब्रह्मपुत्र पर ड्रैगन बना रहा 'मेगा डैम', सरकार बोली- हम निगरानी कर रहे हैं
चीन भारत में ब्रह्मपुत्र बनने वाली त्सांगपो नदी पर बांध बना रहा है। सरकार ने संसद में बताया कि चीन के इस कदम पर नजर रखी जा रही है और भारतीय हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीनी समकक्ष वांग यी से इस मुद्दे पर बात की थी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन की त्सांगपो नदी भारत में आने के बाद ब्रह्मपुत्र बन जाती है। इस नदी के निचले इलाकों पर चीन मेगा डैम बना रहा है। इस तरह की खबरें संज्ञान में आई हैं। इस बात की जानकारी सरकार ने गुरुवार (21 अगस्त, 2025) को संसद में दी। इससे पहले फरवरी में भी इसी तरह की बात सामने आई थी।
केंद्रीय मंत्री कीर्ति सिंह ने बताया कि इस सप्ताह के शुरू में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से दिल्ली में मुलाकात की थी, तब इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
सरकार ने सदन में क्या बताया?
सिंह ने संसद को बताया कि चीन ने 1986 में ही अपने 'मेगा बांध' के विचार को सार्वजनिक कर दिया था और इसके परिणामस्वरूप, सरकार बीजिंग की जलविद्युत परियोजनाओं को विकसित करने की योजना सहित सभी संबंधित घटनाक्रमों पर नजर रख रही है और भारतीय हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है।
इनमें निचले क्षेत्रों में रहने वाले भारतीयों के जीवन और आजीविका की सुरक्षा के उपाय शामिल हैं। सरकार ने बाढ़ नियोजन के लिए महत्वपूर्ण त्सांगपो/ब्रह्मपुत्र के बारे में अपडेटेड डेटा की जरूरत पर भी जोर दिया और चीन के साथ 2002 में हुए समझौता ज्ञापन की समाप्ति का भी उल्लेख किया।
इसे 2008, 2013 और 2018 में नवीनीकृत किया गया था, लेकिन चीन ने 2017 में जानकारी प्रदान नहीं की। बाद में बीजिंग ने डेटा साझा न करने के लिए तकनीकी कारणों को जिम्मेदार ठहराया।
सरकार ने कहा कि सीमा पार नदियों से निपटने में सहयोग की आवश्यकता और जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों के प्रावधान को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर चीन के साथ कई द्विपक्षीय वार्ताओं में प्रकाश डाला गया है, जिसमें जुलाई में क्षेत्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन के लिए श्री जयशंकर की यात्रा भी शामिल है।
जनवरी में भारत ने चीन के समक्ष अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं और उससे आग्रह किया था कि वह "यह सुनिश्चित करे कि ब्रह्मपुत्र के निचले राज्यों के हितों को ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों से नुकसान न पहुंचे।"
चीन ने क्या कहा?
पिछले महीने चीनी सरकारी मीडिया ने कहा था कि बांध का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। बीजिंग ने इस परियोजना को अपने कार्बन तटस्थता लक्ष्यों और आर्थिक लक्ष्यों से जोड़ा था और राज्य समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि उत्पादित बिजली पूरे देश में वितरित की जाएगी।
शिन्हुआ ने कहा कि इस परियोजना में पांच जल विद्युत स्टेशनों का निर्माण शामिल होगा, जिसका कुल निवेश लगभग 1.2 ट्रिलियन युआन (167.1 बिलियन डॉलर) होने का अनुमान है।
दिसंबर में बीजिंग ने कहा था कि इस परियोजना का नदी के निचले हिस्से पर कोई "नकारात्मक प्रभाव" नहीं पड़ेगा और ये भी कहा था कि चीन नदी के "निचले इलाकों में स्थित देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखेगा।"
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