हाईवे पर बढ़ी सुरक्षा की रफ्तार, कोविड के बाद पहली बार सड़क हादसों में आई बड़ी कमी
कोरोना महामारी के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में 4.1% की कमी आई है, जो सड़क सुरक्षा प्रयासों की सफलता का संकेत है। ...और पढ़ें

कोविड के बाद पहली बार सड़क हादसों में आई बड़ी कमी। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में 4.1% की कमी दर्ज।
सरकार की 4ई रणनीति ने निभाई अहम भूमिका।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक सुधार देखा गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बाद पहली बार देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजमार्गों और केंद्र के अधीन एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 4.1 प्रतिशत घटकर 62,122 रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 64,772 था। यातायात सामान्य स्तर पर लौटने के बावजूद हादसों में आई यह गिरावट सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में राज्य राजमार्गों और शहरी सड़कों पर दुर्घटनाओं का दबाव बना रहा, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर सुधार देखने को मिला। सरकार इसका श्रेय अपनी 4ई रणनीति एजुकेशन, इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर को दे रही है।
अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पाट्स को दुरुस्त करने, सड़कों के बेहतर डिजाइन, स्पष्ट संकेतक, एक्सेस कंट्रोल, स्पीड कैमरों और इलेक्ट्रानिक निगरानी जैसे कदमों का सकारात्मक असर सामने आया है। वहीं, 'गोल्डन आवर' में कैशलेस इलाज जैसी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं ने भी कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक सुधार दर्ज किया गया, जहां हाईवे पर मौतों की संख्या 9,560 से घटकर 7,573 रह गई। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 4,644 से घटकर 3,610 और पंजाब में 1,562 से घटकर 1,022 पर आ गया।
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हालांकि तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हाईवे दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिनमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा की चुनौती अब भी गंभीर बनी हुई है। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, चालक की थकान और मोबाइल फोन के इस्तेमाल से ध्यान भटकना आज भी घातक दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह हैं।
सरकार के ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल के ताजा आंकड़े सुधार का संकेत जरूर देते हैं, लेकिन इस रुझान को बनाए रखने के लिए सख्त प्रवर्तन, बेहतर सड़क अवसंरचना और जनजागरूकता पर लगातार काम करने की जरूरत होगी।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)