नई दिल्ली पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री, होर्मुज से दो भारतीय जहाज निकले
गरीबाबादी और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दोनों ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन (14 व 15 मई) में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए हुए हैं ...और पढ़ें

ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए ईरान के विदेश और उप विदेश मंत्री (फोटो- एक्स)
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ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए ईरान के विदेश और उप विदेश मंत्री
संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करने पर जोर देगा ईरान
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने जहां होर्मुज जलमार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से उचित फीस लेने के फैसले को सही ठहराया है, वहीं भारत से उम्मीद जताई है कि उसकी अगुआई में हो रहे ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद पश्चिम एशिया युद्ध पर बयान जारी किया जाएगा।
गरीबाबादी और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दोनों ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन (14 व 15 मई) में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए हुए हैं।
भारत के दो और एलपीजी जहाजों को होर्मुज से बाहर निकलने की इजाजत मिली
गरीबाबादी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि ईरान भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने दे रहा है। इसके कुछ घंटे बाद 13 मई की देर रात यह खबर आई है कि भारत के दो और एलपीजी जहाजों को होर्मुज से बाहर निकलने की इजाजत मिली है।
गरीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य खुला हुआ है, लेकिन ईरान एक सेवा शुल्क लागू कर रहा है। यह शुल्क कुछ समुद्री सेवा देने के लिए लिया जा रहा है। यह शुल्क तीन सिद्धांतों पारदर्शिता, गैर-भेदभावपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगाया जाएगा।
उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए टोल टैक्स लगा रहा है। गरीबाबादी के मुताबिक, ईरान समुद्री आवागमन पर संयुक्त राष्ट्र के तहत बने कानून का हिस्सा नहीं है। हम जहाजों को समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने पर फीस नहीं लगा रहे, बल्कि हम प्रोटोकाल के तहत सेवा देने के लिए फीस लगा रहे हैं।
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भारतीय जहाजों को होर्मुज का इस्तेमाल करने के लिए प्राथमिकता दी जा रही
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बारे में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। गरीबाबादी ने यह भी कहा कि भारतीय जहाजों को होर्मुज का इस्तेमाल करने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।
सनद रहे, युद्ध की शुरुआत के समय भारत के 25 जहाज होर्मुज में फंसे हुए थे, जिनमें से 11 निकल चुके हैं। दो और जहाजों के अगले दो दिनों के भीतर वहां से बाहर निकलने की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों ने की है।
ईरान के रुख से साफ है कि वह इस बार पूरी कोशिश करेगा कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र हो।
गरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र को लेकर कही ये बात
गरीबाबादी का कहना है कि यह सही संदेश नहीं जाएगा, अगर संयुक्त बयान में मौजूदा स्थिति का जिक्र नहीं हो। इससे पता चलेगा कि ब्रिक्स में एकता नहीं है। साथ ही उन्होंने सीधे तौर पर ब्रिक्स के अन्य देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर आरोप लगाया कि वह संयुक्त बयान जारी करने की राह में इकलौता अड़चन है।
माना जा रहा है कि भारत ईरान और यूएई दोनों के बीच संवाद स्थापित करने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री अराघची की गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात होनी है।
संकट सुलझाने के लिए भारत की पहल का स्वागत एएनआइ के अनुसार, ईरान ने मंगलवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में मदद के लिए भारत की किसी भी पहल का स्वागत करेगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले भारत के निष्पक्ष दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है और हमेशा शांति के पक्ष में रहा है। उन्होंने भारत और ईरान को ''एक संस्कृति वाले दो राष्ट्र'' बताया।
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