Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बेल्जियम का भारत को खास ऑफर: LAC पर बढ़ेगी सेना की ताकत; टैंक टरेन से चीन परेशान

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 06:37 PM (IST)

    बेल्जियम की जॉन कॉकरिल ने भारत को अपने उन्नत 105 मिमी टैंक टरेट की पेशकश की है, जिसे विशेष रूप से पहाड़ी युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह टरेट LAC ...और पढ़ें

    105 मिमी टैंक टरेट।                  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    105 मिमी टैंक टरेट। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    HighLights

    1. बेल्जियम की जॉन कॉकरिल ने 105 मिमी टरेट की पेशकश की।

    2. पहाड़ी युद्ध के लिए 42 डिग्री ऊंचाई पर फायर क्षमता।

    3. LAC पर भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने में सहायक।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी पर्वतीय युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन से साथ LAC पर घटते-बढ़ते तनाव और हिमालयी क्षेत्रों में सैन्य तैनाती की चुनौतियों के बीच हल्के और अधिक प्रभावी हथियारों की जरूरत महसूस की जा रही है। इस बीच बेल्जियम की डिफेंस कंपनी जॉन कॉकरिल ने भारत को अपने उन्नत 105 मिमी टैंक टरेट बेचने की पेशकश की है।

    कंपनी का दावा है कि यह टरेट विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में युद्ध संचालन के लिए डिजाइन किया गया है तथा हिमालयी क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में प्रभावी साबित हो सकता है।

    कंपनी के अनुसार, इस टरेट की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता है। सामान्य टैंकों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर निशाना साधने की यह क्षमता पहाड़ी युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां दुश्मन ऊंटी चोटियों और ढलानों पर तैनात हो सकता है।

    जॉन कॉकरिल के इस सिस्टम में ऑटोमैटिक लोडर लगाया गया है, जिससे गोला-बारूद लोड करने की प्रक्रिया तेज होती है और चालक दल का कार्यभार कम होता है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है, जो कठिन भौगौलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।

    क्या है टैंक टरेट?

    टरेट किसी भी टैंक का वह हिस्सा होता है जिसमें मुख्य तोप, फायर कंट्रोल सिस्टम और कई अन्य हथियार प्रणालियां लगी होती हैं। यह 360 डिग्री तक घूम सकती है और विभिन्न दिशाओं में निशाना साध सकता है। जॉन कॉकरिल का प्रस्ताव एक टैंक नहीं, बल्कि एक ऐसा टरेट सिस्टम है, जिसे अलग-अलग बख्तरबंद वाहनों पर भी लगाया जा सकता है।

    खबरें और भी

    जॉन कॉकरिल के 105 मिमी टरेट की खासियत?

    कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम खास तौर पर कठिन और पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है।

    इसकी प्रमुख विशेषताएं...

    • 105 मिमी की मुख्य तोप
    • 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता
    • ऑटोमैटिक लोडर
    • आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम
    • हल्के प्लेटफॉर्म पर लगाने की सुविधा

    42 डिग्री एलीवेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

    सामान्य टैंकों की तोपें सीमित ऊंचाई तक ही ऊपर उठ सकती हैं। लेकिन पहाड़ी युद्ध में दुश्मन अक्सर ऊंची चोटियों और ढलानों पर मौजूदा होता है। ऐसी स्थिति में 42 डिग्री तक ऊंचाई पर फायर करने की क्षमता टैंक को ऊंचाई पर स्थिति लक्ष्यों पर हमला करने में मदद कर सकती है। यही कारण है कि कंपनी इसे हिमालय जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बता रही है।

    ऑटोमैटिक लोडर से क्या फायदा होगा?

    परंपरागत टैंकों में गोला-बारूद लोड करने के लिए एक अलग क्रू सदस्य की जरूरत होती है। जबकि ऑटोमैटिक लोडर फायरिंग की गति बढ़ाता है। चालक दल की संख्या कम कर सकता है। सीमित जगह वाले हल्के टैंकों में उपयोगी साबित होता है। कठिन परिस्थितियों में संचालन को आसान बनाता है।

    भारतीय सेना को इसकी जरूरत क्यों पड़ सकती है?

    भारतीय सेना लंबे समय से ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से तैनात किए जा सकें। वजन में अपेक्षाकृत हल्के हों और तेजी से मूव कर सकें। जिससे पहाड़ी इलाकों में प्रभावी फायर सपोर्ट दे सकें। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में ऐसी क्षमताओं का विशेष महत्व है।

    जॉन कॉकरिल का 105 मिमी टरेट भारतीय सेना की पर्वतीय युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया एक दिलचस्प प्रस्ताव है। इसकी हाई एलीवेशन कैपेसिटी, ऑटोमैटिक लोडर और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम इसे हिमालयी युद्धक्षेत्र के लिए आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला भारतीय सेना के परीक्षणों और परिचालन जरूरतों पर निर्भर करेगा।

    यदि यह प्रणाली अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो भारत की पर्वतीय युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

    यह भी पढ़ें- नेशनल डिफेंस अकेडमी के पूर्व छात्र और रणनीति के महारथी हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ... ऐसा रहा आर्मी चीफ तक का सफर