कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस एवं भाजपा के बीच छिड़ा विज्ञापन युद्ध, महात्मा गांधी के नाम पर सियासत तेज
कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच विज्ञापन युद्ध छिड़ गया है, जिसमें महात्मा गांधी की छवि का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्नाटक ग ...और पढ़ें

कर्नाटक में महात्मा गांधी को लेकर सियासत
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में छिड़े विज्ञापन युद्ध ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिससे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को मानने वाले स्तब्ध हैं।
कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही सियासी खींचतान में बापू के चित्र और उनके व्यक्तित्व के 'दुरुपयोग' पर कर्नाटक गांधी स्मारक निधि ने कड़ा ऐतराज जताया है।
स्मारक निधि ने इसे केवल एक विज्ञापन नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के मूल सिद्धांतों का अपमान और राष्ट्रीय चिंता का विषय बताया है।
बापू के नाम पर सियासत
वार-पलटवार विवाद की शुरुआत तीन फरवरी को हुई, जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक पूर्ण पृष्ठ का विज्ञापन जारी किया। इसमें महात्मा गांधी को 'संघ-अप्पा' (खाकी पैंट और सफेद शर्ट पहने एक पात्र) को फटकार लगाते हुए दिखाया गया था। विज्ञापन का उद्देश्य मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन और केंद्र की नीतियों पर निशाना साधना था।
इसके जवाब में, सात फरवरी को भाजपा ने भी पलटवार किया। भाजपा के विज्ञापन में गांधीजी को हाथ में लाठी उठाए मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को मारने के लिए उद्यत दिखाया गया।
इसमें गांधीजी को यह कहते हुए चित्रित किया गया कि 'मेरे नाम को अपनी संपत्ति समझने वाले 'नुंगप्पा' (सब कुछ हड़प जाने वाले), मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा।'
इस अमर्यादित चित्रण पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कर्नाटक गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष वुडे पी. कृष्णा और सचिव एमसी नरेंद्र ने एक संयुक्त बयान जारी किया और कहा, 'यह सत्य-अहिंसा के दर्शन की हत्या है।'
बापू के नाम पर ऐसे विज्ञापन, देश के लिए शर्म की बात
वुडे पी. कृष्णा और एमसी नरेंद्र ने कहा, 'जिस तरह से गांधीजी को विज्ञापनों में पेश किया गया है, वह उनके दर्शन को समझने वाले किसी भी व्यक्ति को झकझोर देगा। यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है और उनके अहिंसा, सत्याग्रह और सर्वोदय के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।'
स्मारक निधि ने चेतावनी दी कि दलीय राजनीति के लिए बापू की छवि का इस तरह उपयोग करना युवा पीढ़ी को गलत संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा कि गांधीजी दुनिया भर में पूजनीय हैं, लेकिन हाल के दिनों में मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार उनके व्यक्तित्व को छोटा करना एक विचलित करने वाली प्रवृत्ति है।
(सामाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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