'किसी भी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय', परिसीमन पर PM मोदी ने दक्षिण के राज्यों से किया वादा
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की परिसीमन संबंधी चिंताओं को दूर किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिणी राज् ...और पढ़ें
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन परिसीमन का विरोध..। विपक्ष के इस 'कितु-परंतु' को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैसे ही तकनीकी पेच और बहानेबाजी की संज्ञा दी है, जिसके कारण तीन दशकों में अब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं हो सका।
परिसीमन पर सवाल उठा रहे विपक्ष को उन्होंने अपनी गारंटी के साथ आश्वस्त किया कि राज्यों में सीटों का जो अनुपात पहले से चला आ रहा है, उससे छेड़छाड़ नहीं होगी। इस प्रक्रिया में उत्तर-दक्षिण, किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं- PM
प्रधानमंत्री ने चेताया कि राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि जो आज महिला आरक्षण का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। चूंकि, सरकार के सामने संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती है, इसलिए उस ओर इशारा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि नंबर का खेल समय तय करेगा, लेकिन देश की नारी शक्ति नीयत देखेगी। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को लोकसभा में विधेयकों पर मतदान होना है।
लोकसभा में गुरुवार को नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के साथ परिसीमन और सीट बढ़ाने की आवश्यकता क्यों है। उस वक्त लोकसभा की दर्शक दीर्घा में लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं बैठी थीं।
मोदी ने कहा कि आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 वर्ष पहले जब महिला आरक्षण का विचार सामने आया, तभी उसे लागू कर देते। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, वह खुद के 30 वर्षों के परिणामों को देख लें। इसको राजनीतिक रंग देने की आवश्यकता नहीं है।
विपक्ष के किंतु-परंतु को बहानेबाजी बताया
विपक्ष के किंतु-परंतु के पीछे की वास्तविकता को देश के सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पहले गलियारों में चर्चा चलती थी कि पंचायतों में आसानी से आरक्षण दे देंगे, क्योंकि उसमें उन्हें खुद का पद जाने का डर नहीं है। यहां संसद में बैठे लोग यहां कभी महिला आरक्षण लागू नहीं करेंगे, क्योंकि इससे उनके हिस्से का कुछ जाएगा।
भले ही उन्होंने किसी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख नहीं किया, लेकिन इशारा मनमोहन सरकार की ओर था, जब राज्यसभा से तो महिला आरक्षण विधेयक पारित हो गया था, लेकिन लोकसभा से नहीं। तब लगभग सभी राजनीतिक दलों की मनोदशा समान थी। कोई नहीं चाहता था कि पंचायतों की तरह विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण दिया जाए।
उनकी चिंता अपनी हिस्सेदारी घटने को लेकर थी। अब मोदी सरकार के प्रस्ताव में इस चिंता का निराकरण भी दिखाई दे रहा है कि मौजूदा सीटों के अतिरिक्त सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटों में वृद्धि का प्रस्ताव है। इन बढ़ी सीटों पर महिलाओं को मौका मिल सकता है। अब तक महिलाओं का हक मारे जाने को पाप बताते हुए प्रधानमंत्री ने इसे प्रायश्चित का अवसर बताते हुए सभी दलों से आग्रह किया कि इसको राजनीति के तराजू पर मत तौलिये, यह राष्ट्रहित का निर्णय है।
महिला आरक्षण 2029 से लागू करने का प्रस्ताव
आज पूरा देश, विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी ही, उससे ज्यादा हमारी नीयत देखेगी। हमारी नीयत का खोट नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।राजनीतिक श्रेय की बात उठा रहे विपक्ष को जवाब दिया कि 2023 में इस नए सदन में सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया गया, इसीलिए 2024 में किसी को इसका अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। साथ ही चुटकी ली, 'यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है।
आप सभी सर्वसम्मति से इसे पारित करिए तो सबको लाभ मिलेगा, अगर पारित नहीं होगा तो सिर्फ हमें लाभ होगा। हमें श्रेय नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित हो जाएगा, मैं विज्ञापन देकर, सभी का फोटो लगवाकर धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।'
मोदी ने चेताया कि 25-30 वर्ष पहले जिसने भी विरोध किया, वह विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना। इतने वर्षों में जमीनी स्तर पर पंचायतों से जीतकर आईं महिलाओं में अब राजनीतिक जागरूकता है। वह जमीनी स्तर पर ओपिनियन मेकर हैं। 30 वर्ष पहले वे शांत रहती थीं। समझती थीं, लेकिन बोलती नहीं थीं। अब पंचायतों में नेतृत्व कर चुकीं लाखों महिलाएं आंदोलित हैं।
क्या है मामला
महिला आरक्षण को लेकर गुरुवार को सरकार ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए, जो इस प्रकार हैं
महिला आरक्षण को वर्ष 2034 के बजाय वर्ष 2029 से लागू करने के लिए संशोधन विधेयक
सभी राज्यों में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का विधेयक
विधानसभाओं में भी परिसीमन के बाद 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव।
केंद्र शासित प्रदेशों में भी दोनों विधेयकों को लागू करने का प्रस्ताव
विपक्ष का विरोध
परिसीमन के जरिये केंद्र सरकार कुछ खेल करना चाहती है। सीटों का गठन कुछ इस तरह होगा कि उसे राजनीतिक फायदा पहुंचे। उत्तर के राज्यों की तुलना में दक्षिण के राज्यों की अहमियत कम होगी।
केंद्र सरकार की दलील
तीन दशक से अटके महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के लिए सीटें बढ़ाना व्यवहारिक। इससे सामान्य सीटें कम नहीं होंगी। सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ेंगी और प्रतिनिधित्व में कोई बदलाव नहीं होगा।
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