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    Bike Ambulance: गांव और कस्बों तक मिनटों में पहुंचेगी बाइक एंबुलेंस, पूरे देश को मिलेगा लाभ

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 10:32 PM (IST)

    केंद्र सरकार देशभर में दोपहिया एंबुलेंस सेवा शुरू करने की तैयारी में है, जिससे भीड़भाड़ वाले शहरों और दूरदराज के इलाकों में आपात चिकित्सा सहायता समय प ...और पढ़ें

    गांव और कस्बों तक मिनटों में पहुंचेगी बाइक एंबुलेंस।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    गांव और कस्बों तक मिनटों में पहुंचेगी बाइक एंबुलेंस। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    HighLights

    1. केंद्र सरकार देशभर में दोपहिया एंबुलेंस सेवा शुरू करेगी।

    2. संकरी गलियों और दूरदराज के गांवों तक पहुंचेगी मदद।

    3. आपातकालीन स्थिति में 'गोल्डन आवर' में मिलेगी त्वरित सहायता।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बढ़ती आबादी, ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों वाले शहरों में मरीज तक समय पर आपात चिकित्सा सहायता पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार देशभर में दोपहिया सड़क एंबुलेंस सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए मसौदा अधिसूचना जारी कर नियामक ढांचा प्रस्तावित किया है। इसके तहत पहली बार दोपहिया एंबुलेंस को कानूनी पहचान मिलेगी और इनके निर्माण, सुरक्षा, उपकरण, पंजीकरण तथा संचालन के लिए एक समान मानक लागू होंगे।

    दोपहिया एंबुलेंस व्यवस्था शुरू होने से दूर-दराज के गांवों और दुरूह पहाड़ी इलाकों और जंगलों में भी आपात चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जा सकेगी।

    प्रस्तावित एआइएस-209 (भाग-1) 2026 के अनुसार यह एल-2 श्रेणी का विशेष दोपहिया वाहन होगा, जिसके साथ मरीज को ले जाने या प्राथमिक उपचार देने वाली एम्बुलेंस एक्सेसरी यूनिट जुड़ी होगी। इसमें स्ट्रेचर जैसी रोगी-परिवहन प्रणाली, प्राथमिक जीवन रक्षक उपकरण और आपातकालीन चेतावनी लाइटें लगाई जा सकेंगी।

    मानक में वाहन की स्थिरता, ब्रेकिंग क्षमता, पीछे की दृश्यता, सुरक्षित कपलिंग, मरीज की सुरक्षा और मौसम से बचाव जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना या हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में शुरुआती 'गोल्डन आवर' सबसे महत्वपूर्ण होता है। दोपहिया एंबुलेंस भारी ट्रैफिक, संकरी गलियों, ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक एंबुलेंस से पहले पहुंचकर प्राथमिक उपचार दे सकेगी।

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    जरूरत पड़ने पर मरीज को नजदीकी स्थान तक पहुंचाकर वहां से बड़ी एंबुलेंस में स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे प्रतिक्रिया समय घटेगा और गंभीर मरीजों की जान बचने की संभावना बढ़ेगी। शोध भी बताते हैं कि मोटरसाइकिल आधारित एंबुलेंस भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय कमी ला सकती हैं।

    देश में फिलहाल 108 और अन्य आपातकालीन सेवाओं के तहत मुख्य रूप से चार पहिया बेसिक और एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस संचालित होती हैं। हालांकि कुछ शहरों और संस्थाओं ने स्थानीय स्तर पर बाइक एंबुलेंस शुरू की हैं, लेकिन इनके लिए कोई राष्ट्रीय मानक या कानूनी ढांचा नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार नया नियम ला रही है।

    कई राज्यों में चल रही है बाइक एंबुलेंस सेवा

    भारत में हैदराबाद, गोवा, केरल, कर्नाटक और कुछ अन्य राज्यों में सीमित स्तर पर बाइक एंबुलेंस सेवाएं पहले से संचालित हो रही हैं। इनका उपयोग विशेष रूप से ट्रैफिक जाम, समुद्र तटीय इलाकों, धार्मिक आयोजनों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा पहुंचाने के लिए किया जाता है। हालांकि इनके संचालन के लिए अभी तक कोई एकीकृत राष्ट्रीय मानक नहीं था।

    विदेश में भी सफल मॉडल

    ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस), थाईलैंड, ब्राजील, ईरान, मलावी और फिलीपींस जैसे देशों में मोटरसाइकिल एंबुलेंस या 'मोटरलांस' मॉडल का उपयोग वर्षों से किया जा रहा है। इनका इस्तेमाल विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरों और दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए किया जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में इन्हें कम लागत और तेज आपात सेवा का प्रभावी विकल्प माना गया है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)